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चंदौली में लतीफशाह लेफ्ट मेन नहर का तटबंध टूटा, सिंचाई विभाग में मचा हड़कंप, युद्धस्तर पर मरम्मत शुरू

शहाबगंज के लतीफशाह बीयर से निकली लेफ्ट मेन नहर का तटबंध सोमवार को अचानक 15 फीट तक टूट गया। भारी सिल्ट जमा होने से हुए इस हादसे के बाद सिंचाई विभाग में हड़कंप मच गया है, वहीं किसान नेताओं ने लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं।

 

लतीफशाह लेफ्ट मेन नहर टूटी

15 फीट चौड़ाई में बहा तटबंध

सिंचाई विभाग में मची अफरा-तफरी

किसान नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप

मौके पर पहुंचे चकिया क्षेत्राधिकारी

चंदौली जिले के शहाबगंज-चकिया क्षेत्र में सोमवार को सिंचाई व्यवस्था को हिलाकर रख देने वाली एक बड़ी घटना सामने आई है। यहाँ लतीफशाह बीयर से निकली लेफ्ट मेन नहर का तटबंध अचानक कमजोर होकर टूट गया। बताया जा रहा है कि बीयर से करीब 500 मीटर पहले नहर में भारी मात्रा में सिल्ट (मिट्टी और कीचड़) जमा थी। लगभग 50 मीटर लंबाई में सिल्ट जमा होने के कारण अचानक 20 फीट गहरा धंसाव हो गया, जिससे लगभग 15 फीट चौड़ाई में नहर का मजबूत तटबंध ताश के पत्तों की तरह ढह गया।

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अधिकारियों में हड़कंप, पुलिस बल भी पहुंचा
नहर का तटबंध टूटने की खबर जैसे ही फैली, पूरे इलाके के किसानों और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही सिंचाई विभाग के अधिकारी आनन-फानन में अपनी टीम के साथ मौके पर दौड़े। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) चकिया भी भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और अधिकारियों से बात की। फिलहाल विभाग की तरफ से जेसीबी मशीनों और दर्जनों मजदूरों को लगाकर युद्धस्तर पर मरम्मत का काम शुरू करा दिया गया है।


किसान संगठनों ने उठाए तीखे सवाल, लापरवाही के आरोप
इस घटना ने विभागीय दावों की पोल खोल दी है, जिससे किसान संगठन बेहद गुस्से में हैं। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिला अध्यक्ष सतीश सिंह ने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह घटना अफसरों की लापरवाही का जीता-जागता सबूत है। हर साल नहरों की सफाई, सिल्ट निकालने और तटबंधों की मरम्मत के नाम पर कागजों में बड़े-बड़े दावे और बजट पास किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं होता। अगर समय रहते सफाई और सही से जांच की गई होती, तो किसानों को आज यह दिन नहीं देखना पड़ता।

कागजों तक सीमित हैं योजनाएं: आईपीएफ
वहीं, दूसरी तरफ आईपीएफ नेता अजय राय ने भी इस मुद्दे पर सिंचाई विभाग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन और विभाग मिलकर किसानों के हितों की लगातार अनदेखी कर रहे हैं। धान की रोपाई और खेती का यह सबसे जरूरी समय चल रहा है। ऐसे समय में नहर का टूटना किसानों की महीनों की कड़ी मेहनत पर पानी फेरने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मरम्मत और रखरखाव की योजनाएं केवल फाइलों में बंद हैं और धरातल पर सब बदहाल है।

दोषी अफसरों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
नहर टूटने से परेशान किसान नेताओं ने अब प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि नहर के रखरखाव में जिन भी जिम्मेदार अधिकारियों ने लापरवाही बरती है, उन पर तुरंत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। किसानों का साफ कहना है कि केवल आनन-फानन में मिट्टी डालकर मरम्मत कर देना काफी नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए कोई ठोस और स्थायी इंतजाम किया जाना चाहिए। फिलहाल, प्रशासन और विभाग की टीमें मौके पर डटी हुई हैं और किसानों की नजरें इस बात पर हैं कि पानी दोबारा कब तक चालू हो पाता है।

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