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लोकमान्य तिलक की पुण्यतिथि पर डॉ. परशुराम सिंह ने किया नमन, युवाओं से राष्ट्र निर्माण में जुटने की अपील

कटवांमाफी निवासी वृक्ष बंधु डॉ. परशुराम सिंह ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया। उन्होंने देशवासियों और युवाओं से तिलक जी के राष्ट्रवादी विचारों को अपनाकर सशक्त भारत के निर्माण में जुटने का आह्वान किया।

 
 

लोकमान्य तिलक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित

डॉ. परशुराम सिंह ने किया नमन

स्वराज का नारा आज भी प्रेरणादायक

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका

पर्यावरण और सामाजिक समरसता पर जोर

चंदौली जिले के चकिया तहसील क्षेत्र अंतर्गत कटवांमाफी गांव निवासी और राष्ट्र सृजन अभियान (आरएसए) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. परशुराम सिंह ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया। पर्यावरण संरक्षक और 'वृक्ष बंधु' के नाम से चर्चित डॉ. परशुराम सिंह ने तिलक जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देशवासियों से उनके दिखाए रास्ते पर चलने की अपील की।

स्वतंत्रता आंदोलन में तिलक जी का अमूल्य योगदान
डॉ. परशुराम सिंह ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान संवाहक थे। उन्होंने अपने ओजस्वी विचारों से पूरे देश में आजादी की अलख जगाई थी। उनका ऐतिहासिक नारा "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और इसे मैं लेकर रहूंगा" आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति का जज्बा पैदा करता है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को जन-जन से जोड़कर एक बड़े जनआंदोलन का रूप दिया था।

युवाओं से राष्ट्र निर्माण में जुटने का आह्वान
उन्होंने कहा कि आज देश जब विकास और आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है, ऐसे समय में हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखे। युवाओं को लोकमान्य तिलक के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

तिलक जी के विचार आज भी प्रासंगिक
डॉ. परशुराम सिंह ने जोर देकर कहा कि महान राष्ट्रपुरुषों के विचार कभी पुराने या अप्रासंगिक नहीं होते। उनके सिद्धांत आज की नई पीढ़ी को भी देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाते हैं। लोकमान्य तिलक के बताए रास्ते पर चलकर ही हम एक समृद्ध, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के सपने को सच कर सकते हैं।

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