नेताजी की 129वीं जयंती: आदित्य नारायण पुस्तकालय में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सिद्धांतों पर चलने का संकल्प, कवियों ने दी श्रद्धांजलि।
चकिया में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर 'सांस्कृतिक मंच' द्वारा भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। वक्ताओं ने संविधान की रक्षा और कॉर्पोरेट घरानों के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मनाई गई
संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का आह्वान
एआईपीएफ नेता अजय राय का सरकार पर हमला
कवियों को प्रशस्ति पत्र देकर किया गया सम्मानित
भगत सिंह विचार मंच द्वारा वैचारिक विमर्श
चंदौली स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को आदित्य नारायण पुस्तकालय के प्रांगण में 'सांस्कृतिक मंच' द्वारा एक विशेष जन-विमर्श और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने नेताजी और शहीद-ए-आजम भगत सिंह के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।

साम्राज्यवाद और कॉर्पोरेट गठजोड़ पर हमला
एआईपीएफ (AIPF) की राष्ट्रीय फ्रंट कमेटी के सदस्य अजय राय ने मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि नेताजी ने एक ऐसे भारत की कल्पना की थी जहां साम्राज्यवाद का अंत हो और किसानों-मजदूरों के अधिकारों की रक्षा हो। उन्होंने वर्तमान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज कुछ मुट्ठी भर कॉर्पोरेट घरानों के फायदे के लिए लोकतंत्र और संविधान को खतरे में डाला जा रहा है। वित्तीय पूंजी और हिंदुत्व का गठजोड़ देश की संप्रभुता के लिए चुनौती बन रहा है।
विचारधारा और जन-ताकत का संदेश
भगत सिंह विचार मंच के प्रवक्ता श्याम बिहारी सिंह ने कहा कि आज का दौर वैचारिक संघर्ष का है। "सांस्कृतिक मंच" नेताजी और भगत सिंह के त्याग को केवल प्रेरणा नहीं मानता, बल्कि उनके विचारों के साथ जनता को संगठित कर असली आजादी हासिल करने में विश्वास रखता है। उन्होंने जोर दिया कि देश की आजादी समझौतों से नहीं, बल्कि मेहनतकश जनता की ताकत से सुरक्षित रहेगी।
कविता पाठ और सम्मान समारोह
कार्यक्रम के दौरान कवियों ने अपनी ओजस्वी रचनाओं से जोश भरा। डॉ. मिश्रीलाल, तेजबलि 'अनपढ़', पूनम भारती और वसीम अहमद सहित कई रचनाकारों ने अपनी कविताओं के जरिए वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर प्रहार किया। इस अवसर पर सहभागी कवि बंधुओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राधेश्याम जायसवाल ने की और संचालन डॉ. मिश्रीलाल पासवान ने किया। विमर्श में सुदामा पांडे, रामजी यादव, अलियार प्रधान और रुस्तम अली जैसे गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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