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पशु आश्रय स्थल में दम तोड़ते जा रहे हैं जानवर, ऐसा है चकिया का हाल
चंदौली जिले के पशु आश्रय स्थलों का हाल बेहाल होता जा रहा है। जैसे-जैसे ठंड बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे इन जानवरों के ऊपर और भी खतरा मंडराने लगा है।
 

पशु आश्रय स्थल में दम तोड़ रहे जानवर

ऐसा है चकिया का हाल

चंदौली जिले के पशु आश्रय स्थलों का हाल बेहाल होता जा रहा है। जैसे-जैसे ठंड बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे इन जानवरों के ऊपर और भी खतरा मंडराने लगा है। अधिकारी कागजों में आश्रय स्थल को अच्छा से अच्छा बताने और दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन चारा और समुचित इलाज के अभाव में हर दिन जानवर अपनी जान गवा रहे हैं।

Samajwadi Party Leader Babulal Yadav

बताया जा रहा है कि चकिया इलाके में स्थित पशु आश्रय स्थल में एक माह के भीतर आधा दर्जन पशुओं की मौत हो चुकी है। इससे जिम्मेदारान बेखबर हैं और पशु भूख-प्यास से मर रहे हैं। बेजुबान पशुओं के संरक्षण को लेकर शासन गंभीर है। आश्रय स्थलों में पल रहे प्रति पशु के लिए 30 रुपये प्रतिदिन आहार के रूप में शासन द्वारा धन आवंटित किया जाता है। लेकिन आश्रय स्थलों में रखे गए पशुओं को सिर्फ धान का भूसा दिया जा रहा है। 

स्थानीय लोगों का कहना है कि मौके पर हरा चारा, खली, चूनी समेत समुचित आहार व प्रोटीन के नाम पर धान का कन्ना भूसा पर छिड़का जा रहा है। स्थानीय आश्रय स्थल में फिलहाल 132 बेजुबान हैं। इनके लिए टिन शेड बना कर तीन अलग-अलग चरनी बनाई गई है। चरनी में मामूली भूसा के साथ ही धान का कन्ना छिड़का जाता है। इससे एन केन प्रकारेण आश्रय स्थल में पहुंचे पशु जल्द ही बूढ़े हो जा रहे हैं। 

Samajwadi Party Leader Babulal Yadav

आरोप है कि पशुओं का चारा जिम्मेदारान डकार रहे हैं। एक माह में आधा दर्जन पशुओं की मौत हो गई, कर्मचारियों ने इन्हें समीपवर्ती जंगल में फेंक दिया। मरे हुए पशुओं को गड्ढा खोदकर दफनाने की जरूरत नहीं समझी। इससे जंगल किनारे गांव में बसे लोगों को तमाम बीमारी होने का भय सता रहा। 

पशु चिकित्सक डाक्टर सुजीत कुमार सिंह कहते हैं अमूमन प्रति पशु एक दिन में 6 से 8 किलो भूसा खाते हैं। पशुओं को हरा चारा, खली, चूनी आदि समुचित आहार न देने से इनकी भूख खत्म हो जाती है। बेजुबानों के शरीर के माइक्रोफ्रोरा मर जाते हैं। इनकी पाचन शक्ति छीड़ हो जाती है। इसके चलते पशु संतुलित मात्रा में चारा नहीं खा पाते और विभिन्न बीमारियों से जकड़ कर कम उम्र में ही दम तोड़ देते हैं। 

अधिशासी अधिकारी मेहीलाल गौतम ने कहा कि नगर पंचायत से एक संविदा कर्मी व ठेकेदारी प्रथा से चार कर्मचारियों को लगाया गया है। इनकी मॉनिटरिंग नगर पंचायत के कर्मी गुलाम मौर्या करते हैं। आश्रय केंद्र के पशुओं को समुचित आहार न मिलने की जांच की जाएगी।