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मानस सेवा समिति की राम कथा, संत अतुल कृष्ण भारद्वाज ने बताये गृहस्थ जीवन का आदर्श

चंदौली के शहाबगंज में मानस सेवा समिति द्वारा आयोजित राम कथा में संत अतुल कृष्ण भारद्वाज ने गृहस्थ जीवन के आदर्शों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राम-नाम और सत्संग ही जीवन को सार्थक बनाने का सरल साधन हैं।

 

मानस सेवा समिति द्वारा नौ दिवसीय राम कथा

संत अतुल कृष्ण भारद्वाज का गृहस्थ जीवन पर प्रवचन

कलियुग में राम-नाम और सत्संग का महत्व

पारिवारिक संबंधों में मर्यादा और धैर्य का संदेश

शहाबगंज के मसोई गांव में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

चंदौली जिले के शहाबगंज क्षेत्र के मसोई गांव में मानस सेवा समिति द्वारा आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय राम कथा का आयोजन भक्तिमय वातावरण में चल रहा है। कथा के दूसरे दिन प्रसिद्ध कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने गृहस्थ जीवन, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोभ, मोह और कुसंग के चक्कर में फंसकर मनुष्य जन्म-मरण के चक्र में भटकता रहता है।

राम-नाम और सत्संग ही मोक्ष का मार्ग
संत अतुल कृष्ण भारद्वाज ने अपने प्रवचन में कहा कि कलियुग में राम-नाम और सत्संग ही जीवन को सार्थक बनाने के सबसे सरल और प्रभावी साधन हैं। श्रीमद्भागवत और रामचरितमानस जैसे ग्रंथ मनुष्य को सही मार्ग दिखाते हैं और आत्मा का परमात्मा से मिलन कराते हैं। उन्होंने भगवान शिव के उदाहरण के माध्यम से बताया कि एक आदर्श गृहस्थ जीवन कैसा होना चाहिए। उन्होंने पति-पत्नी के संबंधों में मर्यादा, संवाद और समझदारी के महत्व पर विशेष जोर दिया।

पारिवारिक संबंधों में धैर्य की आवश्यकता
कथा व्यास ने परिवार में उत्पन्न होने वाली समस्याओं के समाधान पर चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी विवाद का निपटारा तनाव में नहीं, बल्कि शांत मन और विवेक से करना चाहिए। उन्होंने सामाजिक शिष्टाचार पर भी बात की और कहा कि बिना बुलाए किसी के घर नहीं जाना चाहिए, लेकिन आमंत्रण मिलने पर अवश्य सम्मिलित होना चाहिए। पारिवारिक संबंधों में अहंकार त्यागकर समर्पण की भावना अपनाना ही सुखद जीवन की कुंजी है।

श्रद्धालुओं की उपस्थिति
इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सरिता सिंह, डॉ. विनय प्रकाश तिवारी, मनीष पांडेय, चंद्रेश उर्फ मिंटू पाण्डेय, मंटू सिंह, प्रवीण पाण्डेय, अरुण सिंह, जमुना सिंह, कमला सिंह, अवधेश सिंह सहित क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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