"न नोटिस मिला, न दी जानकारी": सैदूपुर में पान-लस्सी बेचने वाले दुकानदार के हाथ में सीधे कोर्ट की तारीख, ऐसा है बाट-माप विभाग का कारनामा
चंदौली के सैदूपुर बाजार में पान व लस्सी बेचने वाले छोटे दुकानदार अजय जायसवाल को बाट-माप विभाग की ओर से सीधे सीजेएम कोर्ट की तारीख मिल गई है। बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के हुई इस कार्रवाई से दुकानदार बेहद परेशान है।
सैदूपुर बाजार में बाट-माप विभाग की कार्रवाई
बिना पूर्व सूचना सीधे कोर्ट की तारीख
छोटे पान-लस्सी विक्रेता अजय जायसवाल परेशान
सीजेएम कोर्ट में 17 अगस्त को पेशी
विभागीय नोटिस प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
चंदौली जिले के चकिया तहसील अंतर्गत सैदूपुर बाजार में एक छोटे से दुकानदार के साथ अजब-गजब प्रशासनिक कार्रवाई का मामला सामने आया है। बाजार में पान, मैंगो जूस और लस्सी की छोटी सी दुकान चलाकर अपने परिवार का पेट पालने वाले अजय जायसवाल को उस वक्त गहरा झटका लगा, जब उनके पास बाट-माप विभाग से जुड़ा सीजेएम (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) कोर्ट का नोटिस पहुँचा।

बिना पूर्व सूचना या चेतावनी के सीधे मिली कोर्ट की तारीख
पीड़ित दुकानदार अजय जायसवाल का कहना है कि उनकी 'अजय पान भंडार एवं मैंगो जूस व लस्सी कॉर्नर' कोई बड़ा व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं है। इसी छोटी सी बिक्री से उनके पूरे परिवार का खर्च चलता है। दुकानदार का आरोप है कि विभाग ने उन्हें पहले किसी तरह का कोई नोटिस या चेतावनी नहीं दी और न ही किसी कमी या नियम उल्लंघन के बारे में बताया। अब सीधे उन्हें 17 अगस्त 2026 को सीजेएम न्यायालय में पेश होने का आदेश मिला है।
विभागीय कार्यशैली और प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
यह घटना न सिर्फ अजय जायसवाल, बल्कि क्षेत्र के तमाम छोटे व्यापारियों के लिए चिंता का विषय बन गई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या किसी व्यापारी के खिलाफ कानूनी कदम उठाने से पहले उसे अपनी गलती सुधारने या पक्ष रखने का मौका देना विभाग की जिम्मेदारी नहीं है? बिना किसी पूर्व सूचना या सुधार के अवसर के मामला सीधे अदालत तक पहुँचाने की इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दुकानदार ने मांगी पारदर्शी जानकारी और स्पष्टीकरण
नोटिस मिलने के बाद से परेशान दुकानदार अजय जायसवाल ने बाट-माप विभाग के अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जानकारी सार्वजनिक करने की माँग की है। उन्होंने माँग की है कि अधिकारी बताएं कि उनके खिलाफ यह कार्रवाई कब और किस आधार पर की गई। अब देखना यह होगा कि विभागीय अधिकारी इस पूरे मामले पर क्या सफाई देते हैं और क्या पीड़ित को राहत मिल पाती है।
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