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सैदूपुर समर कैंप में गूंजी मातृभाषा की गूंज, विद्यार्थियों को सिखाया भारतीय भाषाओं के संरक्षण का पाठ

चंदौली के किसान इंटर कॉलेज सैदूपुर में जारी सात दिवसीय भारतीय भाषा समर कैंप के पांचवें दिन विद्यार्थियों को मातृभाषा व क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया, जिसमें मिथिला भाषा की सांस्कृतिक विशेषताओं ने बच्चों को खूब आकर्षित किया।

 
 

किसान इंटर कॉलेज सैदूपुर में भाषाई गतिविधियां

मिथिला भाषा की उत्पत्ति और सांस्कृतिक विशेषताएं

नई शिक्षा नीति में मातृभाषा को विशेष महत्व

अंग्रेजी के साथ मातृभाषा का संरक्षण जरूरी

चंदौली जिले की चकिया तहसील के सैदूपुर स्थित किसान इंटर कॉलेज में भाषाई विविधता और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक अनूठी पहल की जा रही है। बीते 14 मई से शुरू हुए सात दिवसीय भारतीय भाषा समर कैंप के पांचवें दिन सोमवार को छात्र-छात्राओं को भारतीय भाषाओं के संरक्षण, उनके ऐतिहासिक महत्व तथा समृद्ध साहित्यिक परंपराओं के बारे में विस्तार से जागरूक किया गया। इस दौरान विद्यालय परिसर भाषाई गतिविधियों और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के रंग में रंगा नजर आया।

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मिथिला भाषा की उत्पत्ति और सांस्कृतिक विरासत पर हुई विशेष चर्चा
समर कैंप के पांचवें दिन के सत्र में विद्यार्थियों को विशेष रूप से मिथिला भाषा की उत्पत्ति, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक विशेषताओं से अवगत कराया गया। शिक्षकों ने केवल व्याख्यान ही नहीं, बल्कि विभिन्न संवादात्मक गतिविधियों, ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी (क्विज) और रोचक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों को भारतीय संस्कृति की जड़ों से जोड़ने का सफल प्रयास किया। इस रचनात्मक शिक्षण शैली के चलते छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भाषाई गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया और भारतीय भाषाओं के प्रति अपनी गहरी रुचि प्रदर्शित की।

मातृभाषा ही है व्यक्ति की वास्तविक पहचान: राम अवतार मौर्य
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के हिंदी प्रवक्ता राम अवतार मौर्य ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय भाषाएं हमारे देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मातृभाषा किसी भी व्यक्ति की वास्तविक पहचान होती है। यदि हम अपनी क्षेत्रीय और स्थानीय भाषाओं को संरक्षित रखेंगे, तभी हमारी भारतीय संस्कृति और सभ्यता अक्षुण्ण बनी रह सकती है। उन्होंने युवाओं से अपनी मूल भाषा के अध्ययन और दैनिक व्यवहार में इसके प्रयोग को बढ़ाने की अपील की।

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नई शिक्षा नीति और आधुनिक युग में भाषाओं का संतुलन
सत्र के समापन पर विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेश कुमार ने नई शिक्षा नीति (NEP) का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान शैक्षिक व्यवस्था में मातृभाषा और भारतीय भाषाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है। ऐसे समर कैंप विद्यार्थियों को अपनी लुप्त होती संस्कृति और भाषाई विरासत को समझने का बेहतरीन अवसर देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक दौर की आवश्यकताओं को देखते हुए अंग्रेजी भाषा का ज्ञान निश्चित रूप से आवश्यक है, लेकिन इसके चक्कर में अपनी मातृभाषा और गौरवशाली क्षेत्रीय विरासत को भूल जाना कतई उचित नहीं है।

प्रधानाचार्य ने बताया कि समर कैंप के आगामी दिनों में विभिन्न भाषाई प्रतियोगिताएं, निबंध लेखन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि नई पीढ़ी में अपनी भाषाओं के प्रति सम्मान, गर्व और गहरी रुचि पैदा की जा सके।

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