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वीर सपूत की अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब: तिरंगे में लिपटकर पैतृक गांव पहुंचे शहीद अरविंद मौर्य, 'अमर रहें' के नारों से गूंजा शहाबगंज

भारतीय सेना के जवान अरविंद मौर्य का पार्थिव शरीर राष्ट्रीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव शहाबगंज पहुंचा। नम आंखों से हजारों लोगों ने अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी। सेना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया।

 
 

शहीद के सम्मान में शहाबगंज कस्बा रहा पूर्णतः बंद

सेना की टुकड़ी ने दिया 'गार्ड ऑफ ऑनर'

विधायक कैलाश आचार्य ने अर्पित किया पुष्पचक्र

मणिकर्णिका घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

परिजनों के करुण क्रंदन से माहौल हुआ गमगीन

चंदौली जनपद के शहाबगंज क्षेत्र के वीर सपूत और भारतीय सेना के जांबाज हवलदार अरविंद कुमार मौर्य का पार्थिव शरीर शुक्रवार को जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंचा, वहां का माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। तिरंगे में लिपटे अपने लाल के दर्शन के लिए हजारों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। 'जब तक सूरज चांद रहेगा, अरविंद तेरा नाम रहेगा' और 'भारत माता की जय' के उद्घोष से समूचा आकाश गुंजायमान हो उठा।

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सैन्य सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर
दिल्ली के सैन्य अस्पताल में उपचार के दौरान अंतिम सांस लेने वाले शहीद अरविंद मौर्य का पार्थिव शरीर जब सैन्य वाहन से गांव लाया गया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें छलक आईं। सेना के जवानों ने पूरे अनुशासन और राजकीय सम्मान के साथ शहीद को 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया। बंदूकों की सलामी और सेना की टुकड़ी के मातमी धुन के बीच हर किसी का सिर गर्व और दुख से झुक गया। यह दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर नागरिक अपनी भावनाओं को रोक नहीं सका।

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शोक में बंद रहा शहाबगंज कस्बा
अपने वीर सपूत के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए शहाबगंज कस्बे के समस्त व्यापारियों ने स्वतः स्फूर्त अपनी दुकानें बंद रखीं। जैसे ही शव यात्रा कस्बे से गुजरी, लोगों ने पुष्प वर्षा कर शहीद को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने सड़कों के किनारे खड़े होकर नम आंखों से अपने गौरव को विदा किया। पूरा इलाका शहीद अरविंद के बलिदान की गाथाएं सुना रहा था।

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परिजनों का करुण क्रंदन और ढांढस बंधाते लोग
शहीद के घर के भीतर का दृश्य हृदयविदारक था। पिता चंद्रशेखर उर्फ पारसनाथ मौर्य और माता सुशीला देवी अपने लाल को खोने के गम में डूबे थे। पत्नी मुन्नी देवी का रो-रोकर बुरा हाल था, वह बार-बार बेसुध हो जा रही थीं। शहीद के दो मासूम पुत्रों, आरुष और अंश को पिता के बलिदान की महत्ता तो पता थी, लेकिन उनके सिर से उठे साये ने उन्हें तोड़कर रख दिया था। बड़ी बहन रेखा मौर्य और भाई अनिल मौर्य के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि
इस दुखद अवसर पर क्षेत्रीय विधायक कैलाश आचार्य ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया। उन्होंने कहा कि अरविंद की शहादत पर पूरे जनपद को गर्व है और सरकार उनके परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार एडवोकेट ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले ऐसे वीर सपूतों का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। इस दौरान ब्लॉक प्रमुख शम्भू नाथ यादव, बीडीओ दिनेश सिंह सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

मणिकर्णिका घाट पर पंचतत्व में विलीन
 शहीद अरविंद कुमार मौर्य के पार्थिव शरीर को वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट ले जाया गया, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके ज्येष्ठ पुत्र ने मुखाग्नि दी। इस दौरान उपस्थित हजारों लोगों ने नम आंखों से 'अमर रहे' के जयकारों के साथ अपने प्रिय जवान को अंतिम विदाई दी।

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