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भक्ति ही मानव जीवन में प्रेम और दिव्यता को है लाती-- श्री शरण दास जी
वनदेवी माता मंदिर चल रहे नव दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे निशा पर आचार्य पंडित श्री शरण दास जी ने भगवान श्री सुखदेव जी की स्वरूप का ध्यान करते हुए निष्काम भक्ति योग का वर्णन किया।
 
मानव को मुक्ति का उपाय केवल भक्ति है-श्री शरण दास जी

चंदौली जिला के चकिया तहसील अंतर्गत बन देवी ग्राम में वनदेवी माता मंदिर चल रहे नव दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे निशा पर आचार्य पंडित श्री शरण दास जी ने भगवान श्री सुखदेव जी की स्वरूप का ध्यान करते हुए निष्काम भक्ति योग का वर्णन किया।

   उन्होंने कहा कि मनुष्य गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी उस परम अलौकिक परमात्मा का अनुभव एवं दर्शन कर सकता है। तथा मनुष्य अपने शुभ कर्मों से जीवन में दिव्यता का अनुभव कर सकता है। जिससे मनुष्य को यह जीवन जीते हुए स्वर्ग हो जाता है लेकिन जब वह पाप कर्म करता है तो जीते जी ही जीवन नर्क हो जाता है।मनुष्य को स्वर्ग और नरक दोनों इसी धरा धाम पर भोगना पड़ता है।

  कथावाचक पंडित श्री शरण दास जी ने कहा कि मानव को मुक्ति का उपाय केवल भक्ति है। भक्ति का मार्ग गुरु के शरण में जाने से प्राप्त होता है। गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य को इस भव बंधन से छुटकारा गुरु ही दिला सकते हैं और इस शरीर से जीवन मुक्त उस परम अलौकिक परमात्मा का दर्शन करा सकते हैं इसलिए बिना सद्गुरु की शरणागति बिना भक्ति का स्वरूप समझ में नहीं आता। कहा कि भक्ति मानव के जीवन में प्रेम और दिव्यता लाती है।

इस दौरान शीतला प्रसाद केशरी, राजाराम यादव, बच्चे लाल जायसवाल, सुनील प्रजापति, हंशु प्रजापति, ओम प्रकाश शर्मा, डब्लू चौबे, गोपाल दुबे, प्रमोद चौबे, गुरु विश्वकर्मा, रवि शंकर विश्वकर्मा, जितेंद्र प्रजापति आदि श्रोतागण उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन ओमप्रकाश पांडेय व्यास तथा संचालन राजेश कुमार विश्वकर्मा ने किया।