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प्राथमिक विद्यालय शिकारगंज का जर्जर गेट बना 'ओपन टॉयलेट', सिस्टम की संवेदनहीनता से भविष्य पर संकट

सरकारी पुरस्कारों का गौरव गान करने वाले प्राथमिक विद्यालय शिकारगंज की जमीनी हकीकत डराने वाली है। जर्जर मुख्य द्वार, चारों ओर फैली गंदगी और खुले में शौच के बीच नौनिहाल शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।

 

शिकारगंज प्राथमिक विद्यालय की घोर बदहाली

करोड़ों का बजट फिर भी गंदगी का अंबार

मुख्य द्वार बना खुले में शौच का केंद्र

पुरस्कार प्राप्त स्कूल में स्वच्छता की कमी


चंदौली जिला अंतर्गत चकिया विकासखंड की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। जहां एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें 'कायाकल्प योजना' और 'स्वच्छ विद्यालय-स्वस्थ भविष्य' के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, वहीं प्राथमिक विद्यालय शिकारगंज की तस्वीरें सिस्टम की संवेदनहीनता का जीता-जागता उदाहरण पेश कर रही हैं। विद्यालय का मुख्य परिसर आज कूड़े के ढेर और दुर्गंध के बीच घिरा हुआ है, जो न केवल शिक्षा के माहौल को दूषित कर रहा है, बल्कि वहां आने वाले मासूम बच्चों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ है।

पुरस्कारों के शिलालेख वाले स्कूल का हाल 

बता दें कि इस विद्यालय का भव्य मुख्य द्वार वर्ष 2017-18 में 14वें वित्त आयोग की योजना के तहत तत्कालीन ग्राम प्रधान द्वारा बनवाया गया था। इस गेट पर लगे शिलालेख पर गर्व से उन पुरस्कारों का उल्लेख है जो राज्य और भारत सरकार द्वारा विद्यालय को दिए गए थे। लेकिन आज वही शिलालेख गंदगी की परतों के नीचे दब चुका है। लाखों की लागत से बना यह मुख्य द्वार वर्षों से बंद पड़ा है और उचित रखरखाव के अभाव में पूरी तरह जंग खाकर गल चुका है। जिस गेट को विद्यालय की शान होना चाहिए था, वह आज भ्रष्टाचार और लापरवाही की कहानी बयां कर रहा है।

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स्कूल के गेट पर मौजूद गंदगी

मुख्य द्वार बना 'ओपन टॉयलेट'

सबसे विडंबनापूर्ण स्थिति यह है कि विद्यालय का मुख्य गेट बंद होने के कारण शिक्षक और छात्र एक छोटे से मिनी गेट से प्रवेश करने को मजबूर हैं। बंद पड़े मुख्य द्वार के आसपास के क्षेत्र को स्थानीय लोगों ने खुले में शौच का अड्डा बना लिया है। विद्यालय की दहलीज पर फैली इस गंदगी के कारण पूरे दिन वहां ऐसी दुर्गंध उठती है कि बच्चों का कक्षा में बैठना तक दूषित हो गया है। हैरानी की बात यह है कि विद्यालय के शिक्षक और जिम्मेदार अधिकारी प्रतिदिन इसी रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन किसी ने भी इस स्थिति को सुधारने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए।

भविष्य की नींव पर लापरवाही की जंग

प्राथमिक विद्यालय किसी भी राष्ट्र के भविष्य की नींव होते हैं, लेकिन शिकारगंज की यह तस्वीर बताती है कि नींव ही कमजोर की जा रही है। जब शिक्षा के मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही स्वच्छता की धज्जियां उड़ रही हों, तो बच्चों के मन में अनुशासन और स्वास्थ्य के प्रति क्या संदेश जाएगा? ग्रामीणों का आरोप है कि निरीक्षण के नाम पर आने वाले अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति करते हैं।

यदि समय रहते मुख्य गेट की मरम्मत नहीं कराई गई और वहां फैली गंदगी को साफ कर सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह लापरवाही किसी बड़ी महामारी का कारण भी बन सकती है। अब देखना यह है कि बेसिक शिक्षा विभाग इस शर्मनाक स्थिति पर कब जागता है।

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