खरौझा में श्रीराम कथा की धूम, मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने बताया जीवन का सार
चंदौली के खरौझा गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन काशी की कथावाचिका शालिनी त्रिपाठी ने गुरु-शिष्य परंपरा और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे प्रभु के स्मरण से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
हिनौती हनुमान मंदिर पर उमड़ी भारी भीड़
शालिनी त्रिपाठी की वाणी से बहा भक्ति रस
परिवार में प्रेम से होता है लक्ष्मी वास
ताड़का वध प्रसंग से अधर्म पर विजय संदेश
चंदौली स्थित चकिया तहसील क्षेत्र के खरौझा गांव के हिनौती मौजा में भक्ति की बयार बह रही है। यहाँ स्थित हनुमान मंदिर परिसर में हनुमान सेवा समिति द्वारा आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ रहा है। कथा के चौथे दिन बुधवार को काशी से पधारीं प्रख्यात कथावाचिका मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने अपनी ओजस्वी और भावपूर्ण वाणी से श्रीराम कथा का रसपान कराया।

परमात्मा का स्मरण है संकटों का समाधान
कथावाचिका शालिनी त्रिपाठी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि राम कथा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और जीवन को सही दिशा देने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि कोई श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ कथा का श्रवण करता है और प्रभु के आदर्शों को अपने मन में धारण करता है, तो उसे साक्षात ईश्वर की अनुभूति हो सकती है। उनके अनुसार, जीवन में आने वाली किसी भी कठिन बाधा या संकट के समय केवल ईश्वर का सच्चा स्मरण ही शांति और कष्टों से मुक्ति दिला सकता है।
परिवार में प्रेम और भक्ति का महत्व
जीवन के मूल आधारों पर चर्चा करते हुए उन्होंने परिवार और परमात्मा के प्रति प्रेम को सर्वोपरि बताया। शालिनी त्रिपाठी ने कहा कि जिस परिवार में परस्पर प्रेम और सद्भाव होता है, वहां माता लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है। उन्होंने खीर का सुंदर उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस प्रकार खीर में चावल कम और दूध-चीनी का मेल अधिक महत्वपूर्ण होता है, उसी प्रकार मानव जीवन में भी ज्ञान और भक्ति का सही संतुलन होना अनिवार्य है।
गुरु-शिष्य संबंध और अधर्म पर विजय
कथा के दौरान महर्षि विश्वामित्र और श्रीराम-लक्ष्मण के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया गया। कथावाचिका ने बताया कि कैसे गुरु विश्वामित्र ने प्रभु श्रीराम को दिव्य विद्याओं का ज्ञान देकर उन्हें धर्म की रक्षा के लिए प्रेरित किया। ताड़का वध के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि संसार में चाहे अधर्म कितना भी प्रबल क्यों न हो जाए, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।
भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ वातावरण
संगीतमय प्रस्तुतियों और मधुर भजनों ने पूरे पंडाल को भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। इस अवसर पर राजन सिंह, जयप्रकाश शर्मा, त्रिवेणी द्विवेदी, दशरथ पांडेय, शशिकांत पांडेय सहित बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने श्रीराम के जयघोष से वातावरण को गुंजायमान कर दिया।
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