खरौझा में 9 दिवसीय संगीतमय श्री राम कथा का भव्य समापन, 'जय श्री राम' के उद्घोष से गूंजा पंडाल
चंदौली के चकिया स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा का भावपूर्ण समापन हुआ। सुप्रसिद्ध कथावाचिका शालिनी त्रिपाठी ने राम-रावण प्रसंग और शबरी भक्ति के माध्यम से जीवन में कर्म और समर्पण का महत्व समझाया, जिससे श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
प्राचीन हनुमान मंदिर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार
मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी के ओजस्वी प्रवचन
भगवान परीक्षा नहीं बल्कि सच्चे प्रेम का विषय
राम नाम की महिमा से पत्थरों का तैरना
भव्य राजतिलक प्रसंग के साथ कथा का समापन
चंदौली जनपद अंतर्गत चकिया तहसील के खरौझा गांव (हिनौती मौजा) में भक्ति और अध्यात्म की अविरल धारा पिछले नौ दिनों से बह रही थी। हनुमान सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का मंगलवार की रात्रि को भव्य समापन हुआ। समापन के अवसर पर पूरा क्षेत्र "जय श्रीराम" के जयघोष से गुंजायमान रहा और श्रद्धालुओं ने भक्ति रस का आनंद लिया।
कर्म ही बनाता है व्यक्ति को महान
कथा के अंतिम दिन काशी की प्रख्यात कथावाचिका मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने अपने मधुर और ओजस्वी वाणी से श्रद्धालुओं को जीवन के सार से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का चिंतन ही उसके आचरण का आधार होता है। राम और रावण का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि एक ही कालखंड में होने के बावजूद, अपने कर्मों के कारण ही एक 'मर्यादा पुरुषोत्तम' कहलाए और दूसरा 'अधम' माना गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भगवान केवल भाव के भूखे होते हैं और उनकी शरण में जाते ही जीवन के सारे कष्ट और अंधकार समाप्त हो जाते हैं।
शबरी प्रसंग और सच्ची भक्ति का संदेश
शालिनी त्रिपाठी ने जटायु और शबरी के प्रसंगों का सजीव वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जहाँ जयंत ने माता सीता को कष्ट दिया, वहीं जटायु ने उनकी रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। शबरी प्रसंग पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति में त्याग और समर्पण अनिवार्य है। भगवान राम ने शबरी को 'नवधा भक्ति' का उपदेश देकर यह सिद्ध किया कि ईश्वर को पाने के लिए किसी आडंबर की नहीं, बल्कि निष्कपट प्रेम और अटूट विश्वास की आवश्यकता होती है।
राम नाम की महिमा और सेवा भाव
कथावाचिका ने आधुनिक समाज में घटते सेवा भाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज आयोजनों में सेवक तो बहुत हैं, लेकिन सेवा का सच्चा भाव लुप्त होता जा रहा है। उन्होंने रामसेतु निर्माण का प्रसंग सुनाते हुए 'राम' नाम की शक्ति बताई। उन्होंने कहा कि जब नल और नील ने पत्थर पर राम का नाम लिखा तो वे तैरने लगे, लेकिन जब स्वयं प्रभु ने पत्थर डाला तो वह डूब गया। इस पर हनुमान जी ने तर्क दिया कि "प्रभु, जिसे आप स्वयं त्याग देंगे, उसका डूबना तो निश्चित ही है।" यह प्रसंग सुनकर पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
लंका विजय और भव्य राजतिलक
कथा के अंतिम चरण में रावण वध और धर्म की स्थापना का मार्मिक चित्रण किया गया। लंका विजय के पश्चात विभीषण का राजतिलक कर भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ पुष्पक विमान से अयोध्या लौटे। जैसे ही कथा में अयोध्या आगमन और भगवान के भव्य राजतिलक का प्रसंग आया, श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पूरे पंडाल में पुष्प वर्षा की गई और आरती के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
इस अवसर पर मुख्य रूप से विधायक कैलाश आचार्य, ग्राम प्रधान राजन सिंह, पताली सिंह, जयप्रकाश शर्मा, विजेंद्र उपाध्याय, रोली सिंह, रूद्र प्रिया सिंह सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
Tags
चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*








