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शिक्षकों के लिए वरदान बना TSCT UP: मात्र ₹15 के सहयोग से पीड़ित परिवारों को मिल रही ₹49 लाख की मदद

उत्तर प्रदेश के शिक्षकों द्वारा संचालित 'टीचर्स सेल्फ केयर समिति' (TSCT) आज देश के लिए प्रेरणा बन चुकी है। बिना किसी चंदे के, पूर्ण पारदर्शिता के साथ यह संगठन दिवंगत शिक्षकों के परिवारों को करोड़ों की आर्थिक सहायता प्रदान कर रहा है।

 
 

अब तक 476 परिवारों को मिली ₹207 करोड़ की मदद

₹15.50 के छोटे सहयोग से ₹49 लाख तक की सहायता

बेसिक से लेकर उच्च शिक्षा तक के सभी कर्मचारी शामिल

दुर्घटना में घायल शिक्षकों के लिए 'जीवनदान' योजना

कन्यादान और गंभीर बीमारी उपचार की नई सौगात

 शिक्षक समाज की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 26 जुलाई 2020 को स्थापित 'टीचर्स सेल्फ केयर समिति' (TSCT) यूपी आज एक राष्ट्रीय मिसाल बन चुकी है। चंदौली जिले सहित पूरे उत्तर प्रदेश में यह संगठन शिक्षकों के बीच सुरक्षा की एक मजबूत दीवार बनकर उभरा है। जिला संयोजक कन्हैयालाल गुप्ता के अनुसार, इस संगठन का मूल मंत्र "सेवा परमो धर्मः" है, जो पूरी तरह स्वैच्छिक और पारदर्शी कार्यप्रणाली पर आधारित है।

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मात्र ₹15 के सहयोग से ₹49 लाख की संजीवनी
टीएससीटी की सबसे क्रांतिकारी विशेषता इसकी सहयोग प्रणाली है। संगठन में कोई चंदा नहीं लिया जाता। जब किसी सदस्य शिक्षक का असामयिक निधन होता है, तो अन्य सदस्य मात्र ₹15.50 का छोटा सा सहयोग करते हैं। वर्तमान में 4.20 लाख सदस्यों के जुड़ाव के कारण, प्रत्येक दिवंगत शिक्षक के परिवार को ₹49 लाख से अधिक की एकमुश्त राशि सीधे उनके नामांकित सदस्य (Nominee) के बैंक खाते में प्राप्त हो रही है। अब तक संगठन ने 476 परिवारों को ₹2 अरब 7 करोड़ 46 लाख से अधिक की सहायता प्रदान कर उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया है।

व्यापक दायरा: शिक्षामित्रों से लेकर उच्च शिक्षा तक
यह समिति किसी एक विशेष संवर्ग तक सीमित नहीं है। इसमें बेसिक, माध्यमिक, और उच्च शिक्षा के शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षामित्र, अनुदेशक, बीईओ, डायट प्रवक्ता, लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी शामिल हैं। सदस्यता पूरी तरह निःशुल्क है। पारदर्शिता का आलम यह है कि सहायता राशि हर महीने की 15 से 25 तारीख के बीच सीधे बैंक ट्रांसफर के जरिए भेजी जाती है, जिसका विवरण पोर्टल पर सार्वजनिक रहता है।

विस्तारित योजनाएं: कन्यादान और जीवनदान
मानवीय संवेदनाओं को देखते हुए टीएससीटी ने अपनी सेवाओं का विस्तार किया है। 1 मई 2025 से गंभीर बीमारी उपचार योजना और 1 जून 2025 से 'कन्यादान योजना' लागू की गई है। कन्यादान योजना के तहत अब तक 257 विवाहों में ₹1.42 करोड़ की आर्थिक मदद दी जा चुकी है। वहीं, सड़क दुर्घटनाओं में घायल 107 शिक्षकों को 'जीवनदान योजना' के तहत ₹34.45 लाख की त्वरित सहायता पहुँचाई गई है।

कुशल नेतृत्व और पारदर्शी भविष्य
प्रदेश अध्यक्ष विवेकानंद आर्य, महामंत्री सुधेश पाण्डेय और कोषाध्यक्ष संजीव रजक के नेतृत्व में यह संगठन आधुनिक तकनीक और मानवीय मूल्यों का संगम पेश कर रहा है। नए नियमों के अनुसार, 1 मार्च 2025 से सदस्यों के लिए लॉक-इन पीरियड भी अनिवार्य किया गया है ताकि व्यवस्था की स्थिरता बनी रहे। टीएससीटी आज केवल एक संगठन नहीं, बल्कि शिक्षक समाज की एकता और आत्मसम्मान का प्रतीक बन चुका है।

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