वनांचल में हाहाकार: 8 दिनों से दर्जनभर गांवों की बिजली-पानी ठप, भीषण गर्मी में पेड़ों की छांव तले कट रही रातें
चंदौली के शहाबगंज वनांचल क्षेत्र में आंधी-तूफान के बाद पिछले 8 दिनों से बिजली और पानी का गंभीर संकट गहराया हुआ है। आक्रोशित ग्रामीणों ने अब बिजली विभाग के खिलाफ आर-पार के आंदोलन का ऐलान कर दिया है। पूरी खबर पढ़ें।
आठ दिनों से अंधेरे में वनांचल
भीषण गर्मी और पेयजल संकट गहराया
आंधी-तूफान से टूटे थे बिजली पोल
विभाग की घोर लापरवाही का आरोप
शुक्रवार से बड़े आंदोलन की चेतावनी
चंदौली जिला अंतर्गत शहाबगंज विकासखंड के वनांचल क्षेत्र में पिछले आठ दिनों से विद्युत आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। इसके कारण स्थानीय जनजीवन बुरी तरह प्रभावित और अस्त-व्यस्त हो गया है। मई महीने की इस भीषण गर्मी और उमस के बीच क्षेत्र के दर्जनभर से अधिक गांव पूरी तरह से अंधेरे के साए में डूबे हुए हैं। बिजली न होने के कारण ग्रामीण इलाकों में न केवल दैनिक दिनचर्या प्रभावित हुई है, बल्कि पेयजल और फसलों की सिंचाई का संकट भी गंभीर रूप से गहरा गया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि विद्युत विभाग की घोर संवेदनहीनता और लापरवाही के चलते अब तक इस सुदूर क्षेत्र की बिजली बहाली के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
आंधी-तूफान के बाद 13 मई से ठप पड़ी है मुसाखांड़ फीडर की सप्लाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चकिया विद्युत उपकेंद्र से संचालित होने वाले मुसाखांड़ फीडर के अंतर्गत आने वाले मुबारकपुर, मल्हर, तिरासी, मुसाखांड़, वनभीषनपुर, ताला, तेंदुई, बीचबनवा, ढोढनपुर, कोल्हुवा, छीत्तमपुर, कौड़िहार और धन्नीपुर गांवों की बिजली व्यवस्था बीते 13 मई को आए तेज आंधी-तूफान के बाद से ही पूरी तरह ध्वस्त है। उस दिन आए भयंकर तूफान के कारण कई जगहों पर बिजली के पोल उखड़कर जमीन पर गिर गए थे और मुख्य सप्लाई के तार टूटकर बिखर गए थे। इस प्राकृतिक आपदा के बाद बुधवार को आठवां दिन बीत जाने के बावजूद विद्युत विभाग द्वारा मरम्मत का कार्य पूर्ण कर आपूर्ति को बहाल नहीं किया जा सका है।
बिजली और पेयजल संकट से मची त्राहि-त्राहि
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में पड़ रही रिकॉर्डतोड़ तपती धूप और उमस के कारण घरों के भीतर बैठना भी दूभर हो चुका है। दिन के समय लोग अपने घरों को छोड़कर बाग-बगीचों और पेड़ों की छांव के नीचे समय व्यतीत करने को विवश हैं। सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति रात के वक्त पैदा हो जाती है, जब घने अंधेरे और बिना पंखे के छोटे बच्चों, असहाय बुजुर्गों तथा महिलाओं की रात की नींद हराम हो जाती है। इसके साथ ही मोबाइल चार्जिंग न होने से लोगों की संचार व्यवस्था और आपसी संपर्क भी पूरी तरह कट गया है। बिजली न होने से गांवों के सभी वाटर मोटर और सबमर्सिबल पंप शोपीस बनकर रह गए हैं, जिससे ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए मीलों दूर भटकना पड़ रहा है।
किसानों को सता रही फसलों की चिंता
कौड़िहार और वनभीषनपुर सहित विभिन्न गांवों के किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि सिंचाई के साधन और नलकूप ठप होने से खेतों में खड़ी फसलों के सूखने और भारी नुकसान होने की आशंका उत्पन्न हो गई है। ग्रामीण सूबेदार मौर्य, रामदुलार, रामाश्रय, रामअवध केशरी, उदयनाथ मौर्य, ओंकार और रामभरोस केशरी ने विभागीय अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जिले के अन्य सुगम क्षेत्रों में आंधी के बाद मात्र दो से तीन दिनों के अंदर आपूर्ति बहाल कर दी गई, परंतु वनांचल क्षेत्र होने के कारण इस इलाके की जानबूझकर उपेक्षा की जा रही है।
अधिकारियों के खिलाफ आक्रोश; 24 घंटे का अल्टीमेटम
विद्युत विभाग के उपखंड अधिकारी (SDO) और कनिष्ठ अभियंता (JE) की उदासीन कार्यशैली से नाराज ग्रामीणों का धैर्य अब पूरी तरह से जवाब दे चुका है। उन्होंने प्रशासन को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटे के भीतर सभी 13 गांवों की बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से बहाल नहीं की जाती है, तो शुक्रवार से चकिया विद्युत उपकेंद्र का अनिश्चितकालीन घेराव किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी जायज मांग को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए बाध्य होंगे।
Tags
चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*








