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मनरेगा का नाम बदलते ही आयी खुशी, अब 'वीबीजी-राम' योजना में ग्रामीणों को मिलेंगे 125 दिन रोजगार और ₹300 दिहाड़ी

शहाबगंज विकास खंड के दो गांवों से 'वीबीजी-राम' योजना का आगाज हो गया है। मनरेगा के इस नए रूप में अब ग्रामीण श्रमिकों को साल में 100 के बजाय 125 दिन का रोजगार मिलेगा और मजदूरी बढ़ाकर ₹300 रोजाना कर दी गई है।

 

मनरेगा का नया नाम हुआ वीबीजी-राम योजना

अब 100 के बदले मिलेगा 125 दिन रोजगार

श्रमिकों को मिलेगी 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी

50 प्रतिशत काम कराएंगी खुद ग्राम पंचायतें

डिजिटल तकनीक और जीआईएस से होगी निगरानी

चंदौली जिले में ग्रामीण विकास और श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए एक बेहद बड़ा कदम उठाया गया है। विकास खंड शहाबगंज के भटरौल और भूसीकृतपुरवा गाँव में गुरुवार को 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन' यानी वीबीजी-राम (VBGI-RAM) योजना का शानदार आगाज किया गया। खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) दिनेश कुमार सिंह और एडीओ पंचायत अरविंद सिंह की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों और मजदूरों को योजना की पूरी जानकारी दी गई।

मनरेगा का बदला नाम, बढ़ी दिहाड़ी
कार्यक्रम के दौरान खंड विकास अधिकारी दिनेश सिंह ने ग्रामीणों को एक बड़ी खुशखबरी दी। उन्होंने बताया कि अब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर 'वीबीजी-राम' कर दिया गया है। नई व्यवस्था के लागू होने से ग्रामीण मजदूरों को अब साल में 100 दिनों के स्थान पर पूरे 125 दिनों के रोजगार की पक्की गारंटी दी जाएगी। इसके साथ ही अब प्रतिदिन की मजदूरी को भी बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया है।

ग्राम पंचायतों को मिले ज्यादा अधिकार
भूसीकृतपुरवा गाँव में आयोजित सभा में एडीओ पंचायत अरविंद सिंह ने बताया कि इस नई योजना को बेहद पारदर्शी बनाया गया है। योजना के अंतर्गत होने वाले कुल विकास कार्यों में से 50 प्रतिशत कार्य सीधे ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराए जाएंगे। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ेंगे, बल्कि गांवों के विकास में सीधे तौर पर पंचायतों की भागीदारी और पकड़ भी पहले से ज्यादा मजबूत होगी।

हाईटेक तकनीक से होगी काम की निगरानी
इस योजना को पूरी तरह भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार डिजिटल तकनीक का सहारा ले रही है। विकास कार्यों की प्लानिंग और उनकी सख्त निगरानी के लिए जीआईएस (GIS) आधारित तकनीक और 'पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म' जैसी आधुनिक प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि यह योजना 'विकसित भारत-2047' के बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल कर रख देगी।

कार्यक्रम में ये सभी लोग रहे मौजूद
रोजगार की इस नई गारंटी योजना के शुभारंभ के मौके पर गाँव के जनप्रनिधियों और श्रमिकों में भारी उत्साह देखने को मिला। इस दौरान मुख्य रूप से ग्राम विकास अधिकारी राजेंद्र भारती, ग्राम पंचायत अधिकारी चंद्रबली सिंह, ग्राम प्रधान सुरेंद्र चौहान, प्रधान प्रतिनिधि मृदुल कुशवाहा आनंद, सतीश सिंह चौहान, सोना देवी और रिंकू देवी सहित भारी संख्या में स्थानीय श्रमिक और ग्रामीण जनता उपस्थित रही।

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