चकिया जिला संयुक्त चिकित्सालय में एंबुलेंस के अभाव में थमी सांसें, रेफ़र होने के बाद भी 3 घंटे तक एंबुलेंस के लिए तड़पता रहा मरीज
चंदौली के चकिया अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। एंबुलेंस मिलने में हुई 4 घंटे की देरी के कारण सैदूपुर निवासी राधेश्याम केशरी की मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्साधिकारी पर अभद्र व्यवहार और अनदेखी का आरोप लगाया है।
एंबुलेंस न मिलने से मरीज की मौत
3 घंटे तक अस्पताल में तड़पा मरीज
चिकित्साधिकारी पर संवेदनहीनता का आरोप
सीएमओ के हस्तक्षेप के बाद मिली एंबुलेंस
उच्चाधिकारियों से शिकायत की तैयारी
चंदौली जनपद के जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया में एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनहीनता उजागर हुई है। एक गंभीर मरीज को वाराणसी रेफ़र किए जाने के बावजूद समय पर एंबुलेंस न मिलने से उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की इस घोर लापरवाही और चिकित्साधिकारी के अड़ियल रवैये ने एक हँसते-खेलते परिवार का सहारा छीन लिया।
रेफ़र के बावजूद एंबुलेंस के लिए 3 घंटे का संघर्ष
जानकारी के अनुसार, सैदूपुर कस्बा निवासी राधेश्याम केशरी की 19 फरवरी को अचानक तबीयत खराब हो गई थी। आनन-फानन में परिजन उन्हें चकिया जिला अस्पताल लेकर पहुँचे। ड्यूटी पर तैनात चिकित्साधिकारी डॉ. निशांत उपाध्याय ने मरीज की हालत नाजुक देखते हुए उसे तत्काल वाराणसी स्थित बीएचयू (सर सुंदरलाल चिकित्सालय) के लिए रेफ़र कर दिया। लेकिन असली जद्दोजहद रेफ़र होने के बाद शुरू हुई। आरोप है कि रेफ़र होने के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई और मरीज को करीब तीन घंटे तक अस्पताल परिसर में ही रोके रखा।
चिकित्साधिकारी के व्यवहार से आक्रोश
मृतक के परिजनों ने बताया कि उन्होंने बार-बार डॉक्टर और स्टाफ से एंबुलेंस की मिन्नतें कीं, लेकिन उनकी पुकार अनसुनी कर दी गई। थक-हारकर परिजनों ने उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश संगठन मंत्री अशोक कुमार गुप्त को फोन किया। आरोप है कि जब श्री गुप्त ने डॉक्टर से फोन पर बात करने की कोशिश की, तो चिकित्साधिकारी ने बातचीत करने तक की जहमत नहीं उठाई। अंततः मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से सीधी वार्ता होने के 30 मिनट बाद एंबुलेंस की व्यवस्था हो सकी।
देरी बनी मौत की वजह
परिजनों का कहना है कि रेफ़र होने और एंबुलेंस मिलने के बीच हुए लगभग 4 घंटे के विलंब ने मरीज की स्थिति को अत्यंत गंभीर बना दिया था। जब राधेश्याम केशरी को वाराणसी के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, तब तक काफी देर हो चुकी थी और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि यदि अस्पताल समय पर संवेदनशीलता दिखाता और एंबुलेंस समय पर मिल जाती, तो मरीज की जान बचाई जा सकती थी।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं की पोल खोल दी है। उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश संगठन मंत्री अशोक कुमार गुप्त ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि इस मामले की शिकायत प्रदेश स्तर के उच्चाधिकारियों से की जाएगी। उन्होंने मांग की है कि दोषी चिकित्साधिकारी और लापरवाह कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी न झेलनी पड़े। फिलहाल, इस पूरे मामले पर अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है।
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