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स्वामी अड़गड़ानंद के आश्रम में घायल बाबा का आरडी मेमोरियल में सफल ऑपरेशन, गोली लगने से हुए थे घायल
सक्तेशगढ़ स्थित स्वामी अड़गड़ानंद के परमहंस आश्रम में गुरुवार की सुबह गोली चली। इसमें एक साधु जीवन बाबा उर्फ जीत (45) के सिर में गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई
 

गोली चलने की घटना से चर्चा में स्वामी अड़गड़ानंद का आश्रम चर्चा में

एक की मौत व दूसरे की हालत गंभीर

मिर्जापुर के सक्तेशगढ़ स्थित स्वामी अड़गड़ानंद के परमहंस आश्रम में गुरुवार की सुबह गोली चली। इसमें एक साधु जीवन बाबा उर्फ जीत (45) के सिर में गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे आशीष बाबा के कमर में गोली लगी। उन्हें गंभीरावस्था में चंदौली स्थित आरडी मेमोरियल चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। यहां बीएचयू के सर्जन ने एक घंटे तक आपरेशन किया। आश्रम में पुलिस विभाग के अफसरों के साथ ही डाग स्क्वायड की टीम छानबीन में जुटी रही।

जानकारी के अनुसार चुनार थाना के सक्तेशगढ़ स्थित परमहंस आश्रम में गुरुवार की सुबह स्वामी अड़गड़ानंद व सेवादार ध्यान में लीन थे। इसी बीच गोली चलने की आवाज आई। जिस तरफ से आवाज आई, भागकर लोग उस तरफ पहुंचे तो देखा जीवन बाबा व आशीष बाबा जमीन पर गिरे पड़े थे। दोनों को गोली लगी थी। घटना के तत्काल बाद मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के सिहोर थाना के छितरी गांव निवासी जीवन बाबा की मौत हो गई थी। आशीष बाबा को गंभीर हालत में चंदौली स्थित डा. आरडी मेमोरियल चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।

अस्पताल के संचालक डा. धनंजय सिंह ने बताया कि गोली बाबा के कमर से पेट में होते हुए आंत कर फंस गई थी। इससे आंत फट गई थी। बीएचयू के सर्जन ने एक घंटे तक आपरेशन कर गोली निकाली। बाबा की हालत खतरे से बाहर है। 

स्वामी अड़गड़ानंद के भक्त देश-विदेश में फैले हैं। आश्रम में गोली चलने और बाबा के भर्ती होने की सूचना के बाद अस्पताल परिसर में भी भक्तों की भीड़ जुट गई। लोग घटना के बारे में जानने के लिए उत्सुक दिखे। मिर्जापुर पुलिस सुरक्षा के मद्देनजर अस्पताल में डंटी रही। पुलिस के अनुसार घटनास्थल से तमंचा बरामद किया गया। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर छानबीन की जा रही है। तहरीर मिलने पर नियामनुसार कार्रवाई की जाएगी। 

जीवन बाबा के खुद को गोली मारकर खुदकशी करने  के पहले आशीष बाबा को गोली मारने की बात सामने आ रही है। आश्रम के सेवादार प्रशांत सिंह डब्बू की मानें तो खुद को गोली मारने वाले जीवन बाबा का आश्रम से कोई संबंध नहीं था। वह एक अवांछनीय तत्व था। इसलिए ऐसी हरकतें करता था।

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