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बेटियों के जन्म पर 50% की छूट: चंदौली के अभिषेक हॉस्पिटल की महिला सशक्तिकरण की ओर बड़ी पहल

चंदौली के अभिषेक हॉस्पिटल ने बेटियों के प्रति समाज की सोच बदलने के लिए अनूठी पहल की है। अब अस्पताल में बिटिया के जन्म पर डिलीवरी फीस में 50% की सीधी छूट मिलेगी। स्वास्थ्य सुविधाओं में यह रियायत महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देगी।

 

बेटियों के जन्म पर अस्पताल शुल्क में भारी छूट

महिला सशक्तिकरण हेतु डॉ. संजय यादव की पहल

गरीब बच्चियों को मुफ्त दवा और इलाज का भरोसा

सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल में विशेष व्यवस्थाएं

समाजसेवियों ने निजी अस्पताल के फैसले का किया स्वागत

चंदौली जनपद में महिला सशक्तिकरण और 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए निजी संस्थान अब सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसी क्रम में जिला मुख्यालय स्थित अभिषेक हॉस्पिटल एवं पैरामेडिकल कॉलेज ने एक क्रांतिकारी घोषणा की है, जिसकी पूरे जिले में सराहना हो रही है।


बेटियों के जन्म पर 50 प्रतिशत की विशेष छूट 
अस्पताल के प्रबंधक और सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. संजय यादव ने सामाजिक उत्तरदायित्व निभाते हुए यह निर्णय लिया है कि उनके संस्थान में यदि कोई बेटी जन्म लेती है, तो डिलीवरी से संबंधित अस्पताल शुल्क में 50 प्रतिशत की विशेष रियायत दी जाएगी। डॉ. यादव का मानना है कि आज भी समाज के कुछ हिस्सों में बेटियों के जन्म को बोझ समझा जाता है। इस भ्रांति को दूर करने के लिए आर्थिक मदद के साथ-साथ सकारात्मक संदेश देना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल छूट तक सीमित नहीं है, बल्कि गरीब और असहाय परिवारों की बच्चियों को दवा और बेहतर इलाज में भी अस्पताल प्रशासन हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।

सुरक्षित प्रसव और महिला स्वास्थ्य पर जोर
 अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनी यादव ने इस पहल का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि एक बेटी का जन्म पूरे समाज के लिए गौरव का क्षण होना चाहिए। डॉ. सोनी यादव के अनुसार, अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए आधुनिक चिकित्सा परामर्श, सुरक्षित प्रसव की तकनीक और नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। उनका कहना है कि जब महिलाएं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होंगी, तभी समाज वास्तविक रूप से सशक्त बनेगा।

समाज ने सराहा नेक कदम 
अभिषेक हॉस्पिटल की इस पहल का स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि यदि अन्य निजी स्वास्थ्य संस्थान भी इसी प्रकार आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं, तो बालिका जन्म दर में सुधार के साथ-साथ उनके प्रति भेदभाव को भी खत्म किया जा सकता है। यह योजना न केवल मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों को आर्थिक राहत देगी, बल्कि बेटियों के स्वागत के उत्सव को भी प्रोत्साहित करेगी।

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