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ऑपरेशन के नाम पर 32 हजार की वसूली का आरोप, बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर आशुतोष विक्रम का इस्तीफा

चंदौली के बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज में एक मरीज से ऑपरेशन के नाम पर ₹32,000 की अवैध वसूली के आरोप में घिरे संविदा डॉक्टर आशुतोष विक्रम ने इस्तीफा दे दिया है। डीएम के निर्देश पर मामले की जांच जारी है।

 

ऑपरेशन के नाम पर वसूली का आरोप

पीड़ित ने कर्ज लेकर चुकाए ₹32,000

डीएम के निर्देश पर जांच शुरू हुई

डॉक्टर आशुतोष विक्रम ने दिया इस्तीफा

मेडिकल कॉलेज प्रशासन करेगा कानूनी कार्रवाई

चंदौली जिले का बाबा कीनाराम अंबेडकर राजकीय मेडिकल कॉलेज एक बार फिर विवादों में घिर गया है। मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग (ऑर्थोपेडिक) विभाग में संविदा पर तैनात डॉक्टर आशुतोष विक्रम ने शनिवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। डॉक्टर का यह इस्तीफा उस समय सामने आया है, जब उन पर एक गरीब मरीज से ऑपरेशन के नाम पर हजारों रुपये की अवैध वसूली कराने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले की जांच अभी चल ही रही थी कि डॉक्टर ने अपना पद छोड़ दिया।

सड़क हादसे में टूटी पैर की हड्डी, इलाज के नाम पर वसूले ₹32,000

पूरा मामला पंकज तिवारी नाम के एक मरीज से जुड़ा हुआ है। पंकज एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे, जिससे उनके दाहिने पैर की हड्डी टूट गई थी। वह इलाज के लिए बड़े भरोसे के साथ सरकारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे, जहां उनका ऑपरेशन भी किया गया। लेकिन पीड़ित का आरोप है कि डॉक्टर आशुतोष विक्रम ने उन्हें बाहर के एक खास मेडिकल स्टोर से सर्जिकल सामान खरीदने के लिए भेज दिया।

आरोप के मुताबिक, उस मेडिकल स्टोर वाले ने सर्जिकल सामानों के नाम पर 20 हजार रुपये और डॉक्टर के खर्चे के नाम पर 12 हजार रुपये, यानी कुल मिलाकर 32 हजार रुपये वसूल लिए। पीड़ित पंकज तिवारी का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के बावजूद उन्हें इतनी बड़ी रकम चुकानी पड़ी, जिसके लिए उन्हें दूसरों से कर्ज तक लेना पड़ा।

डीएम तक पहुंची शिकायत, तो शुरू हुई जांच

इस अंधेरगर्दी से तंग आकर पीड़ित मरीज ने पूरे मामले की लिखित शिकायत सीधे जिले के कप्तान यानी जिलाधिकारी (डीएम) से कर दी। मामले को बेहद गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमित कुमार सिंह को तुरंत जांच के आदेश दिए। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जब जांच शुरू की, तो शुरुआती तौर पर डॉक्टर की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद उनसे लिखित में स्पष्टीकरण मांगा गया था।

बदनामी के डर से खुद दिया इस्तीफा या होनी थी छुट्टी?

जैसे ही जांच की आंच डॉक्टर तक पहुंची, शनिवार की सुबह करीब 10:30 बजे डॉक्टर आशुतोष विक्रम ने अपना इस्तीफा मेडिकल कॉलेज प्रशासन को सौंप दिया। इस पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमित कुमार सिंह ने बताया कि जांच की प्रक्रिया अभी चल ही रही थी। उन्होंने साफ कहा कि डॉक्टर ने अपनी इज्जत बचाने के लिए खुद ही इस्तीफा दे दिया है, क्योंकि अगर वह ऐसा नहीं करते तो विभाग उन्हें नौकरी से टर्मिनेट (बर्खास्त) करने की तैयारी में था।

दूसरी तरफ, आरोपी डॉक्टर आशुतोष विक्रम का कहना है कि यहां इतनी अच्छी सेवा देने के बाद भी अगर उन पर ऐसे झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं, तो ऐसे माहौल में काम करना ठीक नहीं है। इसीलिए उन्होंने खुद हटना बेहतर समझा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आखिरी फैसला मेडिकल कॉलेज प्रशासन को करना है और जो भी निर्णय होगा, वह उन्हें मंजूर है।

अब डीएम की रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजरें

फिलहाल मेडिकल कॉलेज प्रशासन अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को भेजने की तैयारी में जुटा है। अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी के अगले कदम पर टिकी हैं। अगर जांच रिपोर्ट में डॉक्टर और मेडिकल स्टोर वाले के खिलाफ आरोपों की पुष्टि होती है, तो न सिर्फ विभागीय कार्रवाई होगी बल्कि दोषियों को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। यह मामला सरकारी अस्पतालों की ईमानदारी और गरीबों के हक को लेकर एक बड़ा इम्तिहान बन गया है।

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