चंदौली के चकिया गांव में अखाड़े पर अवैध कब्जा, इस नागपंचमी भी सूना रहेगा पारंपरिक खेल का मैदान
चंदौली के चकिया गांव में वर्षों पुराने अखाड़े पर कथित कब्जे से गांव की खेल परंपरा पर संकट मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने डीएम से नागपंचमी से पहले अतिक्रमण हटवाकर अखाड़ा मुक्त कराने की मांग की है।
चकिया गांव अखाड़े पर अवैध कब्जा
नागपंचमी पर सूना रहेगा खेल मैदान
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से लगाई गुहार
अखाड़े की जमीन सीमांकन की मांग
पारंपरिक खेल संस्कृति पर छाया संकट
चंदौली जिले के सदर तहसील क्षेत्र में जिलाधिकारी कार्यालय के पीछे स्थित चकिया गांव का वर्षों पुराना अखाड़ा इन दिनों कथित अतिक्रमण के चलते विवादों में है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के ही कौशल पुत्र सुराहू और राजनारायण पुत्र दल्लू समेत अन्य लोगों ने अखाड़े की जमीन पर कब्जा जमा लिया है। अगर प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाया, तो इस बार भी नागपंचमी पर अखाड़े की परंपरा टूट जाएगी।

नागपंचमी पर होते थे कुश्ती, कबड्डी और खो-खो के दंगल
ग्रामीणों के मुताबिक, यह अखाड़ा लंबे समय से गांव की सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का मुख्य केंद्र रहा है। हर साल नागपंचमी के मौके पर यहां पहलवानी का दंगल, खो-खो, कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों का बड़ा आयोजन होता था। इसमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। हालांकि, अवैध कब्जे के चलते अखाड़े की जमीन इस्तेमाल लायक नहीं बची है, जिससे सभी खेल गतिविधियां ठप पड़ी हैं।

विरासत बचाने को ग्रामीणों ने की डीएम से गुहार
ग्रामीणों का कहना है कि यह अखाड़ा केवल एक मैदान नहीं, बल्कि गांव की सांस्कृतिक विरासत और पहचान का प्रतीक है। इसी अखाड़े से कई युवाओं ने अपनी खेल यात्रा शुरू की थी। अब कब्जे की वजह से नई पीढ़ी अपनी परंपराओं से दूर हो रही है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को लिखित प्रार्थना पत्र सौंपकर नागपंचमी से पहले अखाड़ा मुक्त कराने और जमीन का स्थायी सीमांकन कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो सके।
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