चंदौली के 10 सरकारी स्कूल बनेंगे 'स्मार्ट': 16-16 लाख खर्च करके बनेंगे रोबोटिक लैब और स्मार्ट क्लास, नीति आयोग को भेजा प्रस्ताव
चंदौली के 10 परिषदीय विद्यालयों का भाग्य बदलने वाला है। नीति आयोग की मदद से इन स्कूलों में रोबोटिक लैब, कंप्यूटर लैब और स्मार्ट क्लासेस बनाई जाएंगी। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होने के बाद ये सरकारी स्कूल निजी कॉन्वेंट स्कूलों को सीधी चुनौती देंगे।
10 विशिष्ट परिषदीय विद्यालयों का होगा आधुनिक कायाकल्प
प्रत्येक चयनित स्कूल पर खर्च होंगे 15-16 लाख रुपये
रोबोटिक लैब और स्मार्ट क्लास से लैस होंगे बच्चे
पूरे परिसर की होगी ऑनलाइन सीसीटीवी कैमरे से निगरानी
नीति आयोग से मंजूरी मिलते ही शुरू होगा निर्माण कार्य
चंदौली जिले में परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर बदलने के लिए प्रशासन ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। जिले के 10 विशिष्ट विद्यालयों को चयनित कर उन्हें आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस करने की तैयारी है। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) आर. जगत साई के नेतृत्व में इस कायाकल्प के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर नीति आयोग को भेजा गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को वह तकनीक उपलब्ध कराना है, जो अब तक केवल बड़े शहरों के महंगे निजी स्कूलों तक सीमित थी।
वित्तीय आवंटन और निवेश की योजना
प्रशासनिक योजना के अनुसार, इस विशिष्ट कायाकल्प परियोजना के तहत चयनित प्रत्येक विद्यालय पर लगभग 15 से 16 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। सीडीओ आर. जगत साई ने पिछले माह ही इन विद्यालयों का चयन कर शासन और नीति आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। इस बजट का उपयोग विद्यालय के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ वहां आधुनिक शैक्षणिक उपकरण स्थापित करने में किया जाएगा। यह निवेश न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाएगा, बल्कि जिले के समग्र 'एजुकेशन इंडेक्स' में भी सुधार लाएगा।
विद्यार्थियों को मिलेंगी कॉन्वेंट जैसी सुविधाएं
इन 10 मॉडल स्कूलों में छात्रों के लिए सुविधाओं का पिटारा खुलने वाला है। योजना के अंतर्गत निम्नलिखित प्रमुख विकास कार्य किए जाएंगे:--
1. स्मार्ट और डिजिटल पढ़ाई: सभी कक्षाओं में इंटरएक्टिव डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे ताकि बच्चे डिजिटल माध्यम से रोचक तरीके से पढ़ सकें।
2. अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं: विद्यालयों में कंप्यूटर लैब के साथ-साथ 'मॉड्यूलर कंपोजिट प्रयोगशालाएं' स्थापित होंगी, जहाँ बच्चे लैंग्वेज लर्निंग और रोबोटिक कोडिंग सीख सकेंगे।
3. सुरक्षा और निगरानी: सुरक्षा के लिहाज से पूरे स्कूल परिसर को ऑनलाइन सीसीटीवी कैमरों से जोड़ा जाएगा।
4. बाल वाटिका और पोषण: छोटे बच्चों के लिए आकर्षक 'बाल वाटिका' और ताजी सब्जियों के लिए 'पोषण वाटिका' का निर्माण होगा।
अभिभावकों का विश्वास जीतना बड़ी चुनौती
चंदौली जिले में वर्तमान में 1,185 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जहाँ लगभग 1.83 लाख छात्र पंजीकृत हैं। शासन की तमाम कोशिशों के बावजूद, ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावकों का झुकाव अब भी निजी कॉन्वेंट स्कूलों या छोटे अमान्य निजी स्कूलों की ओर बना हुआ है। प्रशासन को उम्मीद है कि जब ये 10 स्कूल मॉडल के रूप में सामने आएंगे और यहाँ के बच्चे रोबोटिक्स और कंप्यूटर में पारंगत होंगे, तो सरकारी शिक्षा तंत्र के प्रति जनता का खोया हुआ विश्वास पुनः बहाल होगा।
मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साई ने आशा व्यक्त की है कि "प्रत्येक विकास खंड से चयनित इन विशिष्ट विद्यालयों के लिए नीति आयोग से जल्द ही प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिल जाएगी। स्वीकृति मिलते ही युद्ध स्तर पर कार्य शुरू कराया जाएगा ताकि ये स्कूल जिले के अन्य विद्यालयों के लिए एक रोल मॉडल बन सकें।"
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