चंदौली पुलिस लाइन निर्माण पर ब्रेक: किसानों ने रुकवाया काम, बिना पैमाइश निर्माण का विरोध, मुआवजे के आश्वासन पर भी नहीं माने ग्रामीण
चंदौली के भोजापुर में निर्माणाधीन पुलिस लाइन तब विवादों में आ गई जब किसानों ने अपनी निजी जमीन पर अतिक्रमण का आरोप लगाकर काम बंद करा दिया। अधिकारियों की समझाइश और मुआवजे का भरोसा भी किसानों के गुस्से को शांत नहीं कर सका।
किसानों ने रुकवाया पुलिस लाइन निर्माण
निजी जमीन पर चारदीवारी बनाने का आरोप
राजस्व विभाग की पैमाइश पर सवाल
मुआवजे के आश्वासन को किसानों ने नकारा
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हंगामा
चंदौली जिले के सकलडीहा कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत भोजापुर गांव में निर्माणाधीन जिला पुलिस लाइन एक बार फिर विवादों के घेरे में है। जहाँ एक ओर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक इस परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए लगातार निरीक्षण कर रहे हैं, वहीं गुरुवार को स्थानीय किसानों ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर कार्य रुकवा दिया। किसानों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था द्वारा उनकी निजी भूमि पर अवैध तरीके से चारदीवारी का निर्माण किया जा रहा है।
पश्चिमी छोर पर पाइलिंग के काम को लेकर विवाद
पुलिस लाइन का निर्माण कार्य वर्तमान में लगभग 50 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब पुलिस लाइन के पश्चिमी छोर पर चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) के लिए पाइलिंग का काम शुरू किया गया। बर्थरा गांव के दर्जनों किसान मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य में लगी मशीनों को बंद करवा दिया। किसान प्रद्युम्न, चंदन, श्याम बरन और विजय बहादुर सहित अन्य ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि बिना पैमाइश कराए उनकी जमीन में कोई भी खुदाई नहीं होने दी जाएगी।
पैमाइश की मांग पर अड़े किसान
किसानों का आरोप है कि उनकी जमीन की नापी के लिए प्रशासन को बार-बार ज्ञापन दिया गया, लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। किसानों ने यह भी दावा किया कि पुलिस लाइन के निर्माण के कारण उनके हिस्से की जमीन अब मौके पर बहुत कम बची है। किसानों का कहना है कि जब तक राजस्व विभाग की टीम पैमाइश कर उनकी भूमि की सीमाओं का निर्धारण नहीं कर देती, तब तक वे निर्माण कार्य शुरू नहीं होने देंगे।

प्रशासनिक समझाइश का नहीं हुआ असर
सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार राजेंद्र प्रसाद और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों को समझाने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि यदि उनकी निजी जमीन पुलिस लाइन की जद में आ गई है, तो उन्हें नियमानुसार अलग से मुआवजे का भुगतान किया जाएगा। हालांकि, किसान इस 'गोल-मोल' आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए और अपनी जमीन वापस पाने की मांग पर डटे रहे।
विरोध के चलते तनावपूर्ण स्थिति बरकरार
अधिकारियों के जाने के बाद काम दोबारा शुरू करने के प्रयास पर किसान और अधिक नाराज दिखे। किसानों का आरोप है कि अधिकारी उनकी बात सुनने के बजाय केवल निर्माण कार्य जारी रखने का दबाव बना रहे हैं। फिलहाल मौके पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और निर्माण कार्य बाधित है। अब देखना यह है कि प्रशासन पैमाइश कर इस विवाद का समाधान कब तक निकाल पाता है।
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