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भूखे पेट कैसे दें स्वास्थ्य सेवा? चंदौली में वेतन न मिलने से नाराज सैकड़ों CHO ने घेरा CMO दफ्तर

चंदौली में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) का धैर्य जवाब दे गया है। महीनों से वेतन और भत्तों के लिए तरस रहे सैकड़ों अधिकारियों ने सीएमओ कार्यालय का घेराव कर सिस्टम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

 
 

सीएमओ कार्यालय का जोरदार घेराव

कई महीनों से वेतन लंबित

पीबीआई और इंक्रीमेंट का अभाव

ईएमआई और इलाज का संकट

स्वास्थ्य सेवाएं ठप करने की चेतावनी

चंदौली जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) आज खुद 'बीमार' सिस्टम के शिकार हो गए हैं। सोमवार को सैकड़ों की संख्या में सीएचओ ने अपनी लंबित मांगों और रुके हुए वेतन को लेकर सीएमओ कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों ने जमकर नारेबाजी की और प्रशासन पर आर्थिक शोषण का आरोप लगाया।

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महीनों से वेतन गायब, आर्थिक संकट में डूबे परिवार
प्रदर्शन कर रहे अधिकारियों का कहना है कि वे कई महीनों से बिना वेतन के काम करने को मजबूर हैं। केवल वेतन ही नहीं, बल्कि परफॉरमेंस बेस्ड इंसेंटिव (PBI) का भुगतान भी लंबे समय से लटका हुआ है। स्थिति यह है कि इंक्रीमेंट, JAS फंड, TA/DA और कम्युनिकेशन अलाउंस के नाम पर उन्हें एक रुपया भी नहीं मिला है। इससे अधिकारियों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

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EMI और बच्चों की पढ़ाई पर संकट
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी बृजभूषण वर्मा ने बताया कि वेतन न मिलने से उनके घरों की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। बैंक की EMI बाउंस हो रही है, बच्चों की स्कूल फीस जमा करने के पैसे नहीं हैं और बीमार परिजनों का इलाज कराना भी दूभर हो गया है। महिला अधिकारी रेणु ने भावुक होते हुए कहा कि एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ फील्ड में काम करने वाले योद्धाओं को भूखा रखा जा रहा है।

जवाब देने से बचते नजर आए सीएमओ
जब इस पूरे हंगामे और वेतन विसंगतियों पर सीएमओ डॉ. युगल किशोर राय से जवाब मांगा गया, तो वे कैमरे और सवालों से बचते नजर आए। अधिकारियों ने सीएमओ को ज्ञापन सौंपकर तत्काल भुगतान की मांग की है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस आश्वासन न मिलने से कर्मियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

स्वास्थ्य सेवाएं ठप करने का अल्टीमेटम
सीएचओ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनके वेतन और समस्त भत्तों का भुगतान नहीं किया गया, तो वे अपनी सेवाएं पूरी तरह बंद कर देंगे और जनपद स्तरीय बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। यदि ऐसा होता है, तो ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। अब गेंद प्रशासन के पाले में है कि वह इस संकट को कैसे सुलझाता है।

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