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चंदौली जिले के स्वास्थ्य विभाग में घमासान: डिप्टी CMO पर अवैध वसूली के आरोप, CMO साहब दे रहे दलील

चंदौली के स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों भारी हलचल है। एक तरफ बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज अपनी छवि सुधारने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ डिप्टी CMO पर वसूली का आरोप लगाकर डॉक्टरों ने दफ्तर में धरना दे दिया है। जानिए क्या है पूरा मामला।

 
 

चंदौली CMO दफ्तर में डॉक्टरों का धरना

डिप्टी सीएमओ पर लगा वसूली का आरोप

आयुर्वेदिक और एलोपैथिक जांच पर उठा सवाल

बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था सुधार

निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी सच्चाई

 चंदौली जिले का स्वास्थ्य विभाग इन दिनों काफी चर्चा में है। एक तरफ जहाँ बाबा कीनाराम स्वशासीय मेडिकल कॉलेज अपनी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) दफ्तर में डॉक्टरों के धरने से माहौल गर्म हो गया है। निजी डॉक्टरों ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

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बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज में सुधार की कोशिशें
बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज प्रशासन इन दिनों शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर सुधारने के लिए लगातार काम कर रहा है। प्राचार्य डॉ. अमित कुमार सिंह के नेतृत्व में लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है। हालाँकि, निजी प्रैक्टिस को लेकर चल रही कुछ चर्चाओं पर कॉलेज प्रशासन का कहना है कि यह संस्थान की छवि खराब करने की कोशिश है।

CMO दफ्तर में डॉक्टरों का प्रदर्शन और हंगामा
बुधवार को चंदौली के CMO दफ्तर में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब निजी डॉक्टरों के एक संगठन ने डिप्टी CMO डॉ. संजय कुमार यादव के खिलाफ धरना शुरू कर दिया। डॉक्टरों का आरोप है कि जांच के नाम पर डॉक्टरों को परेशान किया जा रहा है। हालाँकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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आईजीआरएस शिकायत से शुरू हुआ पूरा विवाद
मामला एक निजी क्लीनिक की शिकायत से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) पर मिली शिकायत के बाद डिप्टी CMO जांच करने पहुंचे थे। जांच के दौरान आरोप लगा कि आयुर्वेदिक इलाज के साथ-साथ वहां एलोपैथिक दवाएं भी रखी गई थीं। इसी बात को लेकर कार्रवाई की तैयारी की जा रही थी, जिसके बाद डॉक्टर लामबंद हो गए।

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20 हजार रुपये और बंधक बनाने का गंभीर आरोप
धरना दे रहे डॉक्टरों ने डिप्टी CMO पर आरोप लगाया कि उन्होंने मामले को रफा-दफा करने के लिए 20 हजार रुपये लिए और चिकित्सक को घंटों बंधक बनाकर रखा। इतना ही नहीं, संगठन के नेताओं ने CMO डॉ. पारितोष मिश्रा की नियुक्ति और लेनदेन पर भी सवाल उठाए। हालाँकि, विभाग ने इन सभी आरोपों को मनगढ़ंत बताया है।

नियमों और जांच प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
इस पूरे विवाद में एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर मामला केवल आयुर्वेदिक इलाज का था, तो जांच आयुर्वेद विभाग को करनी चाहिए थी। लेकिन अगर एलोपैथी का भी इस्तेमाल हो रहा था, तो दोनों विभागों की जिम्मेदारी बनती है। अब देखना होगा कि शासन इस मामले में किस अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराता है ताकि सच सामने आ सके।

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