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चंदौली जिला अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत, डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगा परिजनों ने काटा हंगामा

चंदौली जिला अस्पताल में इलाज के दौरान झुलसी महिला की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर बवाल किया। चार दिनों तक सुध न लेने और खून चढ़ाने में कोताही बरतने के दावों के बीच पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

 
 

इलाज में लापरवाही का आरोप

अस्पताल परिसर में परिजनों का हंगामा

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

दो मासूम बच्चों की मां की मौत

सीएमएस ने दी सफाई

इलाज के दौरान महिला की मौत और हंगामा उत्तर प्रदेश के चंदौली जिला अस्पताल में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक उपचाराधीन महिला की मौत के बाद उसके परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों का कहना था कि समय पर इलाज और डॉक्टरों की देखरेख न मिलने के कारण मरीज की जान गई है। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

क्या है पूरा मामला? 
सदर कोतवाली क्षेत्र के डेवढ़िल गांव निवासी शिवानंद तिवारी की 30 वर्षीय पत्नी रागिनी तिवारी 19 जनवरी को संदिग्ध परिस्थितियों में गंभीर रूप से झुलस गई थीं। उन्हें तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रागिनी के पति गुजरात के सूरत में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं और उनके दो छोटे बच्चे हैं—छह वर्षीय अंजलि और महज छह माह की वैष्णवी।

परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप 
मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि भर्ती होने के बाद किसी भी चिकित्सक ने मरीज को सही ढंग से नहीं देखा। परिजनों के अनुसार, उन्होंने डॉक्टर से ब्लड चढ़ाने की गुहार लगाई थी, लेकिन एक यूनिट ब्लड पूरा चढ़ने से पहले ही चिकित्सक वहां से चले गए। आरोप है कि पिछले चार दिनों से कोई भी डॉक्टर महिला की स्थिति जांचने नहीं आया, जिससे उसकी हालत बिगड़ती चली गई।

अस्पताल प्रशासन ने दी सफाई
मामले पर सफाई देते हुए जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि रागिनी को 75 प्रतिशत से अधिक झुलसी हुई हालत में लाया गया था। इससे पहले परिजनों ने उन्हें किसी निजी अस्पताल में दिखाया था। डॉ. सिंह के अनुसार, मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजनों की सहमति के बाद ही उपचार शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि मौत के असली कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा और उसी के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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