चंदौली में स्वास्थ्य सेवा सुधारने की पहल : DM बोले- निष्क्रिय आशा बहुओं की सेवा समाप्त, अच्छा कार्य करने वाले होंगे सम्मानित
चंदौली कलेक्ट्रेट में डीएम चंद्र मोहन गर्ग ने स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। उन्होंने लापरवाही बरतने वाली आशा कार्यकर्ताओं को हटाने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की पूरी योजना यहाँ पढ़ें।
निष्क्रिय आशा बहुओं की सेवा समाप्ति के निर्देश
शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव और नियमित टीकाकरण पर जोर
आशा कार्यकर्ताओं का समय पर मानदेय भुगतान सुनिश्चित
पीएचसी स्तर पर ओपीडी सेवाओं को बढ़ाने की हिदायत
सीएसआर (CSR) फंड से बेहतर होंगी स्वास्थ्य सुविधाएं
चंदौली जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक पारदर्शी, सुलभ और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि आम जनता, विशेषकर गरीबों को दी जाने वाली चिकित्सा सुविधाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक के दौरान जिले में संचालित विभिन्न जन कल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई।

लापरवाह आशा बहुओं पर होगी कार्रवाई, समय पर होगा भुगतान
बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ता रहीं। जिलाधिकारी ने आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय भुगतान में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और अधिकारियों को निर्देश दिया कि उनका भुगतान समय से और बढ़े हुए स्तर पर सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने ग्राम स्तर पर कार्य में रुचि न लेने वाली और अपने कर्तव्यों के प्रति निष्क्रिय रहने वाली आशाओं के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया। डीएम ने निर्देश दिया कि ऐसी निष्क्रिय आशा बहुओं को चिन्हित कर उनकी सेवा समाप्त की जाए और उनके स्थान पर नई एवं ऊर्जावान आशाओं की भर्ती प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित न हो।
संस्थागत प्रसव और टीकाकरण पर विशेष फोकस
जिलाधिकारी ने मातृ-शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम करने के उद्देश्य से शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव) सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला का समय पर पंजीकरण किया जाए और सरकारी अस्पतालों में उन्हें हर संभव सुविधा दी जाए। साथ ही, नियमित टीकाकरण अभियान की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि जनपद का कोई भी बच्चा या गर्भवती महिला टीकाकरण से वंचित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने संचारी रोग नियंत्रण अभियान और परिवार नियोजन कार्यक्रमों के लिए जनजागरूकता बढ़ाने और सर्वे कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया।
PHC पर बढ़ेगी ओपीडी, CSR से सुधरेंगे संसाधन
ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को राहत देने के लिए जिलाधिकारी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) पर ओपीडी सेवाओं के विस्तार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर उपचार मिल जाएगा, तो जिला अस्पताल और अन्य उच्च केंद्रों पर अनावश्यक दबाव कम होगा। स्वास्थ्य सुविधाओं के आधुनिकीकरण के लिए डीएम ने जिले में 'कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी' (CSR) गतिविधियों के समन्वय पर बल दिया। इसके लिए उन्होंने सभी सीएचसी और पीएचसी प्रभारियों को ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा ताकि निजी सहयोग से संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।
कर्मचारियों का सम्मान और सेवा भाव की अपील
जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा एक सेवा भाव का कार्य है। आपके कार्यों का सीधा प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है, इसलिए मरीजों के साथ निस्वार्थ भाव से व्यवहार करें। आयुष्मान भारत, जननी सुरक्षा योजना और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम जैसी योजनाओं को पूरी ईमानदारी से धरातल पर उतारने के निर्देश दिए गए। बैठक के अंत में, टेली-कंसल्टेशन के माध्यम से मरीजों को घर बैठे बेहतर परामर्श और उपचार उपलब्ध कराने में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वास्थ्य विभाग के आधा दर्जन कर्मचारियों को जिलाधिकारी द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आर जगत साई, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) सहित चिकित्सा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक का निष्कर्ष यह रहा कि आने वाले समय में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक सुधार और अनुशासन देखने को मिलेगा।
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