DM के कई सवालों के जवाब नहीं दे पाए DSO, जानिए क्यों डांटे गए जिला पूर्ति अधिकारी
चंदौली में जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक में जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने राशन वितरण प्रणाली में सुस्ती पर जिला पूर्ति अधिकारी को फटकार लगाई। उन्होंने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और ई-केवाईसी प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
राशन वितरण में लापरवाही पर डीएम नाराज
ई-केवाईसी प्रक्रिया में तेजी के निर्देश
कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर छापेमारी
डोर-स्टेप डिलीवरी व्यवस्था की समीक्षा
अपात्र राशन कार्ड धारकों पर कार्रवाई
चंदौली जिले में जन वितरण प्रणाली (PDS) को पारदर्शी, सुदृढ़ और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सार्वजनिक वितरण एवं सतर्कता समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। इस बैठक में खाद्यन्न सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी योजना के कार्यान्वयन और राशन वितरण से जुड़ी समस्याओं की विस्तृत समीक्षा की गई। हालांकि, बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु जिला पूर्ति अधिकारी की कार्यप्रणाली रही, जिस पर जिलाधिकारी ने तीखी नाराजगी व्यक्त की।
बैठक में तैयारी को लेकर डीएम की तल्ख टिप्पणी
बैठक की शुरुआत में ही स्थिति उस समय गंभीर हो गई जब जिलाधिकारी ने देखा कि जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) के पास बैठक से संबंधित पर्याप्त तैयारी नहीं है। एजेंडे और रिपोर्टों के अपूर्ण होने पर डीएम ने कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के प्रति ऐसी लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि बैठक में कोरम की पूर्ति और पूरी तैयारी के साथ आना अनिवार्य है, क्योंकि यह जिले के लाखों लाभार्थियों के भोजन सुरक्षा का मामला है।
राशन वितरण में पारदर्शिता और घटतौली पर रोक
जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक राशन कार्ड धारक को उनका हक मिलना चाहिए। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि जनपद में 'घततौली' (राशन कम तोलने) की एक भी शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। इस पर लगाम लगाने के लिए जिलाधिकारी ने समय-समय पर औचक छापेमारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फील्ड में तैनात अधिकारियों को पूरी सक्रियता बरतनी होगी। राशन की दुकानों पर खाद्यान्न वितरण समयबद्ध तरीके से और सुव्यवस्थित हो, यह सुनिश्चित करना आपूर्ति विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अपात्र कार्ड धारक और ई-केवाईसी पर विशेष जोर
बैठक में सतर्कता समिति ने कार्ड धारकों के सत्यापन की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि अपात्र लाभार्थियों के राशन कार्ड का तुरंत सत्यापन कर उन्हें निरस्त किया जाए, ताकि पात्र व्यक्तियों को योजना का लाभ मिल सके। इसके साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता वाली ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया में तेजी लाने के स्पष्ट आदेश दिए गए। उन्होंने कहा कि आधार लिंकिंग और ई-केवाईसी के बिना राशन वितरण में पारदर्शिता नहीं आ सकती, इसलिए इस कार्य को मिशन मोड में पूरा किया जाए।
गैस कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर 'ज़ीरो टॉलरेंस'
राशन के अलावा, जिलाधिकारी ने रसोई गैस (LPG) के अवैध भंडारण और जमाखोरी को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अक्सर त्योहारों या अन्य अवसरों पर गैस की कालाबाजारी की खबरें आती हैं, जो आम जनता की जेब पर डाका डालने जैसा है। डीएम ने आपूर्ति विभाग और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे निरंतर छापेमारी चलाएं। यदि कहीं अवैध भंडारण मिलता है, तो संबंधित एजेंसी संचालक के खिलाफ कठोर विधिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि कोई भी एजेंसी संचालक निर्धारित दर से अधिक की वसूली न करे।
डोर स्टेप डिलीवरी और वाहनों की कमी का समाधान
खाद्यान्न के उठान में आने वाली बाधाओं पर भी चर्चा हुई। डोर-स्टेप डिलीवरी के वाहनों के परिचालन को लेकर आ रही चुनौतियों को देखते हुए डीएम ने कहा कि यदि कहीं वाहनों की कमी है, तो उसे तत्काल दूर किया जाए। खाद्यान्न को गोदाम से राशन की दुकान तक ससमय पहुँचाना सुनिश्चित करना होगा, ताकि वितरण में कोई देरी न हो। उन्होंने सभी उप-जिलाधिकारियों और तहसील स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे वितरण प्रक्रिया के दौरान दुकानों का औचक निरीक्षण करें और अनियमितता मिलने पर तुरंत रिपोर्ट करें।
बैठक में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और समिति के सदस्यों ने भाग लिया। इस महत्वपूर्ण बैठक में चकिया के चेयरमैन गौरव श्रीवास्तव, जिला खाद्य विपणन अधिकारी राधवेन्द्र सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी राजेश नायक सहित जिले के सभी सप्लाई इंस्पेक्टर मौजूद थे। जिलाधिकारी ने अंत में सभी अधिकारियों से कहा कि वे जन वितरण प्रणाली को एक सेवा के रूप में देखें। यह प्रणाली गरीब और जरूरतमंदों के लिए जीवन रेखा है, इसलिए इसमें कोताही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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