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डॉ. गौतम तिवारी की पहल: दादा की याद में मरीजों की निःशुल्क सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य के संकल्प को बढ़ाया आगे

चंदौली के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. गौतम तिवारी ने दादा स्वर्गीय सूर्यनाथ तिवारी की पुण्यतिथि पर सूर्या हॉस्पिटल में निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित किया। समाजसेवा की भावना से दर्जनों गरीब मरीजों का निःशुल्क उपचार कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
 
 

चंदौली के डॉ. गौतम तिवारी ने ‘सूर्या हॉस्पिटल’ में निःशुल्क इलाज

दादा स्वर्गीय सूर्यनाथ तिवारी की पुण्यतिथि पर निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाकर दी श्रद्धांजलि

चंदौली जिले के जाने-माने हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. गौतम तिवारी ने अपने दादा स्वर्गीय सूर्यनाथ तिवारी की पुण्यतिथि पर एक अनूठी श्रद्धांजलि अर्पित की है। डॉ. तिवारी ने अपने सूर्या हॉस्पिटल में एक निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया, जिसमें दर्जनों जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त उपचार और विशेषज्ञ परामर्श प्रदान किया गया। इस पहल से जहाँ गरीब और असहाय मरीजों को तत्काल राहत मिली, वहीं लोगों ने डॉ. तिवारी की समाजसेवा के प्रति गहरी आस्था की सराहना की।

शिक्षक दादा की त्याग भावना

लगभग सात वर्ष पूर्व दिवंगत हुए स्वर्गीय सूर्यनाथ तिवारी न केवल एक समर्पित सरकारी शिक्षक थे, बल्कि वे समाज सेवा में भी गहरी आस्था रखते थे। अपने जीवनकाल में, वे अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा गरीब और जरूरतमंद छात्रों की शिक्षा में खर्च करते थे। उनका मानना था कि समाज को आगे बढ़ाने का एकमात्र माध्यम शिक्षा ही है। उनकी यही प्रेरणा डॉ. गौतम तिवारी के लिए समाज सेवा का मार्गदर्शक बनी और उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में इसी मानवता की भावना को आगे बढ़ाया।

कर्म ही असली पूंजी: दादा के संस्कार

डॉ. तिवारी ने बताया कि उनके दादा के नैतिक संस्कारों ने ही उन्हें जरूरतमंदों की सेवा के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने दादा के कथन को दोहराते हुए कहा, "इंसान की असली पूंजी उसका कर्म है।" इसी सोच को आत्मसात करते हुए उन्होंने अपने दादा के नाम पर ही "सूर्या हॉस्पिटल" की स्थापना की। डॉ. तिवारी हर मंगलवार को निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं ताकि गरीब मरीजों को बिना किसी आर्थिक बोझ के बेहतर इलाज मिल सके। उन्होंने अपनी दादा की पुण्यतिथि पर यह संकल्प लिया है कि वे भविष्य में भी इसी तरह समाज और मानवता की सेवा में समर्पित रहेंगे।

डॉ. गौतम तिवारी का यह कदम उनके दादा की स्मृति को न केवल एक सच्ची श्रद्धांजलि है, बल्कि यह वर्तमान समाज के लिए भी एक प्रेरणा है कि सच्ची मानवता सेवा और त्याग की भावना में निहित है।

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