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चंदौली के किसानों के लिए खुशखबरी: 50% सरकारी अनुदान पर मिलेगा संकर मक्का बीज, मक्का खेती को बढ़ावा देने का प्लान

चंदौली में जायद सीजन के लिए किसानों को 50% सब्सिडी पर संकर मक्का बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। एथेनॉल उत्पादन और पशु आहार में बढ़ती मांग को देखते हुए, यह पहल किसानों की आय दोगुनी करने में मील का पत्थर साबित होगी।

 
 

संकर मक्का बीज पर 50% अनुदान

राजकीय कृषि बीज भंडारों पर उपलब्धता

एथेनॉल उत्पादन के लिए बढ़ी मांग

धान-गेहूं के मुकाबले अधिक मुनाफा

जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशील फसल

चंदौली जनपद के किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने और पारंपरिक खेती से इतर नकदी फसलों को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ी पहल की है। आगामी जायद सीजन में किसानों को उन्नत किस्म का संकर मक्का बीज 50 प्रतिशत अनुदान (सब्सिडी) पर उपलब्ध कराया जाएगा। यह कदम न केवल खेती की लागत कम करेगा, बल्कि किसानों के लिए मुनाफे के नए द्वार भी खोलेगा।

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बीज भंडारों पर उपलब्ध होगी उन्नत किस्में
उप निदेशक कृषि भीमसेन ने बताया कि किसान अपने नजदीकी किसी भी राजकीय कृषि बीज भंडार से यह अनुदानित बीज प्राप्त कर सकते हैं। धान और गेहूं की पारंपरिक खेती पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से मक्का को तीसरी सबसे महत्वपूर्ण फसल के रूप में प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि मोटे अनाजों की वैश्विक मांग को देखते हुए मक्का चंदौली के किसानों के लिए 'व्हाइट गोल्ड' साबित हो सकता है।

एथेनॉल और पशु आहार में बढ़ती मांग
वर्तमान में मक्का की मांग केवल खाद्यान्न तक सीमित नहीं है। इसका बड़े पैमाने पर उपयोग प्रोसेस्ड फूड, पोल्ट्री फीड और पशु आहार में हो रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश में एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का को एक प्रमुख स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। एथेनॉल के बढ़ते प्रयोग से न केवल कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो रही है, बल्कि किसानों को उनकी फसल का उचित और लाभकारी मूल्य भी मिल रहा है।

कम लागत में अधिक मुनाफे का मंत्र
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, मक्का की नई संकर किस्में जलवायु परिवर्तन के प्रति काफी सहनशील हैं। ये किस्में कम समय में तैयार हो जाती हैं और न्यूनतम पानी में भी अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती हैं। पारंपरिक धान-गेहूं के चक्र से हटकर मक्का की खेती करने से मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है और प्रति हेक्टेयर आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

प्रशासन की इस पहल से जिले के हजारों किसानों को सीधा लाभ पहुँचने की उम्मीद है, जिससे चंदौली कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और कदम बढ़ाएगा।

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