"कटेंगे, मरेंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे", विंध्य एक्सप्रेसवे के खिलाफ कलेक्ट्रेट पर किसानों का हल्लाबोल
चन्दौली में विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना के खिलाफ "जमीन बचाओ संघर्ष समिति" के बैनर तले किसानों ने कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। उपजाऊ कृषि भूमि और आजीविका बचाने के लिए किसानों ने केंद्रीय मंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर भूमि अधिग्रहण रद्द करने की मांग की।
विंध्य एक्सप्रेसवे के खिलाफ प्रदर्शन
कलेक्ट्रेट पर जुटे सैकड़ों किसान
केंद्रीय मंत्री को सौंपा ज्ञापन
आजीविका पर मंडराया बड़ा संकट
मांगें न मानने पर आंदोलन की चेतावनी
चंदौली जिले में उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर जिले के अन्नदाताओं का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सोमवार को बड़ी संख्या में किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव किया। "जमीन बचाओ संघर्ष समिति" के बैनर तले एकजुट हुए किसानों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री को संबोधित एक मांग पत्र सौंपा।

खेतों के दो टुकड़े होने और आजीविका छिनने का डर
आंदोलनकारी किसानों का साफ तौर पर कहना है कि जिस जमीन का अधिग्रहण एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए किया जा रहा है, वह बेहद उपजाऊ कृषि भूमि है और उनके परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र जरिया है। किसानों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस परियोजना के आने से उनके लहलहाते खेत दो अलग-अलग हिस्सों में विभाजित हो जाएंगे। इससे न सिर्फ पारंपरिक खेती-किसानी ठप होगी, बल्कि खेतों की सिंचाई व्यवस्था भी पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो जाएगी।
कर्मनाशा नदी क्षेत्र में बाढ़ का गहराया खतरा
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को लेकर भी तकनीकी आपत्तियां उठाईं। उन्होंने आशंका प्रकट की कि कर्मनाशा नदी के तटीय इलाकों में एक्सप्रेसवे का ढांचा खड़ा होने से प्राकृतिक जल निकासी बाधित होगी। इसके परिणामस्वरूप आसपास के दर्जनों गांवों और कृषि योग्य भूमि पर भविष्य में बाढ़ तथा गंभीर जलभराव का संकट खड़ा हो जाएगा, जिससे व्यापक नुकसान होना तय है।
"विकास की कीमत किसानों का भविष्य नहीं हो सकता"
किसान नेताओं ने मंच से अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि वे देश या प्रदेश के विकास के कतई विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की आड़ में किसानों को उजाड़ना बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार को कोई भी कदम उठाने से पहले जमीन की वास्तविकता और किसानों के हितों को ध्यान में रखकर इस पूरी परियोजना पर दोबारा विचार करना चाहिए।
नेताओं की दो टूक: "कटेंगे, मरेंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे"
कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित इस सभा को संबोधित करते हुए किसान नेता रतन सिंह और दीनानाथ श्रीवास्तव ने प्रशासनिक अधिकारियों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो इस आंदोलन को और उग्र तथा व्यापक रूप दिया जाएगा। किसानों ने दो टूक लहजे में नारा बुलंद करते हुए कहा कि "कटेंगे, मरेंगे, आंदोलन करेंगे लेकिन अपनी जान से प्यारी जमीन नहीं देंगे।" मांगों की अनदेखी होने की स्थिति में क्षेत्र में एक बड़े और ऐतिहासिक जनांदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
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