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चंदौली जिले में विंध्य एक्सप्रेस-वे के विरोध में तेजोपुर के किसान 24 घंटे के धरने पर, बोले- जान देंगे लेकिन उपजाऊ जमीन नहीं देंगे

चंदौली में विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का आंदोलन अब तेज हो गया है। तेजोपुर गांव के किसानों ने 24 घंटे का सांकेतिक धरना देकर साफ कर दिया है कि बिना सहमति के वे अपनी जमीन नहीं देंगे।

 
 

विंध्य एक्सप्रेस-वे के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना जारी

'एक गांव-एक दिन धरना' अभियान हुआ तेज

तेजोपुर गांव के किसान बैठे 24 घंटे के धरने पर

किसानों ने दिया 'परियोजना नहीं तो वोट नहीं' का नारा

बिना संवाद सर्वे करने का निजी कंपनी पर आरोप

चंदौली जिले में प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना के विरोध में किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेतृत्व में चल रहा किसानों का अनिश्चितकालीन धरना अब आंदोलन का रूप ले चुका है। धरने के सातवें दिन "एक गांव-एक दिन धरना" अभियान के तहत तेजोपुर गांव के किसान 24 घंटे के सांकेतिक धरने पर बैठ गए। आंदोलन पर बैठे किसानों ने दो टूक शब्दों में शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि जब तक विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना को वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं।

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विकास नहीं बल्कि किसानों के लिए अभिशाप है परियोजना
धरना स्थल पर मौजूद भाकियू (टिकैत) के मंडल प्रवक्ता और किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक मणि देव चतुर्वेदी ने किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेस-वे किसानों के लिए विकास की सौगात नहीं, बल्कि उनकी बर्बादी का अभिशाप साबित होगा। उन्होंने दावा किया कि अब इस परियोजना के खिलाफ विरोध की आग गांव-गांव तक पहुंच चुकी है। हर दिन बड़ी संख्या में नए किसान इस आंदोलन के साथ जुड़ रहे हैं, जिससे यह लड़ाई और भी मजबूत हो रही है।

निजी कंपनी पर बिना बातचीत सर्वे करने का आरोप
आंदोलन में शामिल किसानों का कहना है कि वे अपनी कीमती और उपजाऊ कृषि भूमि को किसी भी कीमत पर एक्सप्रेस-वे के लिए नहीं देंगे। किसानों ने साफ किया कि वे देश में हो रहे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसानों की बिना मर्जी के और प्रशासनिक पारदर्शिता के बिना इस तरह परियोजना को थोपना पूरी तरह गलत है। किसानों ने आरोप लगाया कि एक निजी कंपनी ने जिला प्रशासन के सहयोग से जमीनी स्तर पर जनता से कोई बातचीत किए बिना ही मनमाने ढंग से सर्वे का काम पूरा कर लिया।

वोट न देने का ऐलान और ब्लूप्रिंट का दावा
किसानों के मुताबिक, अगर सही तरीके से सर्वे किया जाता तो कम लागत में और किसानों को कम नुकसान पहुंचाते हुए इस परियोजना का कोई दूसरा बेहतर विकल्प निकाला जा सकता था। किसानों का दावा है कि उनके पास इस संबंध में एक व्यावहारिक ब्लूप्रिंट (योजना) भी तैयार है, जिस पर सरकार बातचीत कर शांति से समाधान निकाल सकती है। धरने के दौरान किसानों ने "जब तक परियोजना वापस नहीं, तब तक वोट नहीं" का नारा भी बुलंद किया। इस मौके पर संतोष यादव, मनीष सिंह, पूर्व प्रधान गुड्डू, विकास सिंह, अशोक कुमार सिंह, गोपाल सिंह, अजय कुमार सिंह समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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