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किसानों के लिए खुशखबरी: फसलों को बीमारियों से बचाने वाले रसायनों पर सरकार दे रही 75% की भारी छूट!

चंदौली में खरीफ फसलों की बुवाई से पहले प्रभारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों को बीज शोधन की सलाह दी है। कृषि रक्षा इकाइयों पर जरूरी रसायन 75% के बंपर अनुदान पर मिल रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें।

 
 

बुवाई से पहले बीज शोधन करने की सलाह

खड़ी फसल में महंगे रोगों से मिलेगी मुक्ति

कृषि रक्षा इकाइयों पर 75 प्रतिशत अनुदान

धान और दलहन की फसलों के लिए उपाय

ट्राइकोडरमा से भूमि शोधन का आसान तरीका

चंदौली जिले के किसानों के लिए खेती-किसानी से जुड़ी एक बेहद जरूरी और काम की खबर है। प्रभारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार यादव ने जिले के किसानों से खरीफ फसलों की बुवाई करने से ठीक पहले बीज और भूमि का शोधन (उपचार) करने की जोरदार अपील की है। उन्होंने बताया कि अगर किसान शुरुआत में ही यह छोटा सा कदम उठा लें, तो फसलों को बाद में होने वाली कई महंगी बीमारियों से आसानी से बचाया जा सकता है।

खड़ी फसल में इलाज करना पड़ता है महंगा
कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों को समझाते हुए कहा कि जब फसल खड़ी हो जाती है और उसमें रोग लग जाता है, तब उसकी रोकथाम करना बेहद खर्चीला और मुश्किल होता है। बीज शोधन करने से बीज की सतह पर चिपके हुए हानिकारक फफूंद और कीटाणु शुरुआत में ही नष्ट हो जाते हैं। इससे पौधा शुरुआती दौर से ही मजबूत और पूरी तरह स्वस्थ होकर निकलता है, जिससे किसानों की लागत घटती है और पैदावार बढ़ती है।

धान और दलहन के लिए अधिकारी की खास सलाह
अधिकारी विनोद कुमार यादव ने अलग-अलग फसलों के लिए जरूरी तरीके भी साझा किए हैं:--

1-धान की फसल: धान में झुलसा, मिथ्या कंडुआ और धारीदार रोग से बचाव के लिए प्रति किलो बीज में 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम (50 प्रतिशत) या 2.5 ग्राम थीरम (75 प्रतिशत) मिलाकर ही बुवाई करें।

2-उड़द और मूंग: उकठा रोग से बचाने के लिए प्रति किलो बीज में 5 ग्राम ट्राइकोडरमा मिलाएं। वहीं भूमि शोधन के लिए 2.5 किलो ट्राइकोडरमा को 50 किलो सड़ी गोबर की खाद में मिलाकर हफ्ते भर छाया में रखें और आखिरी जुताई के वक्त खेत में डाल दें।

3-दीमक की समस्या: जिन खेतों में दीमक का प्रकोप ज्यादा है, वहां किसान भाई 2.5 किलो ब्यूवैरिया वैसियाना (1 प्रतिशत डब्लू०पी०) को 50 किलो गोबर की खाद में मिलाकर इस्तेमाल करें।

सरकारी केंद्रों पर मिल रही 75% की भारी छूट
किसानों की जेब पर ज्यादा बोझ न पड़े, इसके लिए सरकार ने भी बड़े इंतजाम किए हैं। प्रभारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि कवकनाशी और कीटनाशी समेत सभी बीज शोधक रसायन जिले के सभी विकास खंडों (ब्लॉकों) में स्थित राजकीय कृषि रक्षा इकाइयों पर उपलब्ध हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इन सभी रसायनों पर सरकार की तरफ से किसानों को 75 प्रतिशत का भारी अनुदान (सब्सिडी) दिया जा रहा है, ताकि हर छोटा-बड़ा किसान इसका आसानी से लाभ उठा सके।

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