चंदौली के जिला कृषि अधिकारी बोले- जिले में खाद और बीज का पर्याप्त स्टॉक, अफवाहों से बचें
चंदौली में खरीफ सीजन के लिए धान, ढैंचा (कैंचा) के बीज और सभी प्रकार की खादों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। किसान भाई सरकारी पोर्टल पर बुकिंग करके सीधे 50 प्रतिशत की भारी छूट पर बीज हासिल कर सकते हैं।
जिले में खाद-बीज का पर्याप्त स्टॉक
धान बीज पर पचास प्रतिशत अनुदान
अब तक भारी मात्रा में वितरण
कृषि अधिकारी ने की सतर्क रहने की अपील
यूरिया के अधिक उपयोग से बचने की सलाह
चंदौली जिले में खरीफ की फसलों की बुवाई शुरू होते ही चंदौली के जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने किसानों के लिए बेहद जरूरी जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि जनपद में खरीफ फसलों के लिए धान के बीज, ढैंचा (कैंचा) बीज और विभिन्न प्रकार के उर्वरकों (खाद) का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। उन्होंने किसान भाइयों से विशेष अपील की है कि वे बाजार में फैलने वाली किसी भी तरह की अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें और अपनी जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी करें।
बीज पर मिल रहा 50 प्रतिशत का सीधा अनुदान
कृषि अधिकारी के मुताबिक, जिले के सभी नौ विकास खंडों के राजकीय कृषि बीज भंडारों पर 1168 क्विंटल धान का बीज और 722.80 क्विंटल ढैंचा का बीज उपलब्ध कराया गया है। इसमें से अब तक 700 क्विंटल धान और 674 क्विंटल ढैंचा के बीज का वितरण पीओएस (POS) मशीन के जरिए पारदर्शिता से किया जा चुका है। किसान भाई agriculture.up.gov.in पोर्टल पर जाकर अपनी ऑनलाइन बुकिंग करा सकते हैं और सीधे 50 प्रतिशत अनुदान (सब्सिडी) पर उन्नत बीज प्राप्त कर सकते हैं।
सहकारी समितियों और केंद्रों पर खाद का बड़ा स्टॉक
जिले में उर्वरकों की उपलब्धता का आंकड़ा जारी करते हुए उन्होंने बताया कि इस समय वर्तमान में 17237 मीट्रिक टन यूरिया, 5106 मीट्रिक टन डीएपी, 402 मीट्रिक टन एमओपी, 4141 मीट्रिक टन एनपीकेएस और 12607 मीट्रिक टन एसएसपी का मजबूत स्टॉक गोदामों में सुरक्षित है। खरीफ सीजन में अप्रैल से लेकर 8 जून 2026 तक निजी केंद्रों और साधन सहकारी समितियों के माध्यम से 675 मीट्रिक टन यूरिया, 379 मीट्रिक टन डीएपी, 4 मीट्रिक टन एमओपी, 68 मीट्रिक टन एनपीकेएस और 180 मीट्रिक टन एसएसपी का वितरण किसानों के बीच किया जा चुका है।
यूरिया के अंधाधुंध इस्तेमाल से बचने की सलाह
जिला कृषि अधिकारी ने किसानों को एक जरूरी वैज्ञानिक सलाह भी दी है। उन्होंने कहा कि किसान भाई अपने खेतों में जरूरत से ज्यादा यूरिया का इस्तेमाल कतई न करें। यूरिया के अत्यधिक उपयोग से धान के तने बहुत ज्यादा मुलायम और लंबे हो जाते हैं, जिससे फसल के गिरने और उसमें हानिकारक रोग व कीट लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा, ज्यादा यूरिया डालने से खेत की उपजाऊ क्षमता पर बुरा असर पड़ता है और पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। इसलिए किसान अपने खेत के क्षेत्रफल के हिसाब से तय मात्रा में ही खाद डालें।
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