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चंदौली में मिलावटखोरों की चांदी! सिर्फ दो अफसरों के भरोसे पूरा खाद्य सुरक्षा विभाग, ठप होने की कगार पर जांच

चंदौली जिले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। कभी सात अफसरों वाले विभाग में अब सिर्फ दो ही कमान संभाले हैं। जानिए कैसे निलंबन और तबादलों ने जनता की सेहत को खतरे में डाल दिया है।

 
 

निलंबन और तबादलों से स्टाफ की भारी कमी

सात के बजाय केवल दो अधिकारी संभाल रहे जिम्मेदारी

मिलावटी खाद्य पदार्थों की जांच और नमूना संग्रहण प्रभावित

प्रयोगशाला में हर महीने 10 नमूने भेजना बड़ी चुनौती

चंदौली जिले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग इन दिनों खुद बीमार नजर आ रहा है। विभाग में कर्मचारियों और अधिकारियों की लगातार हो रही कमी का सीधा असर अब जमीन पर सरकारी कामों और जांच पर दिखाई देने लगा है। जिस विभाग में पहले कभी सात अधिकारी और कर्मचारी मिलकर काम संभालते थे, वह आज सिर्फ दो अफसरों के भरोसे चल रहा है।

इस भारी कमी की वजह से त्योहारों और आम दिनों में बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच, दुकानों से नमूना संग्रहण (सैंपल कलेक्ट करना) और मिलावटखोरों के खिलाफ होने वाली कानूनी व प्रवर्तन कार्रवाई पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। वर्तमान समय में पूरे जिले का कार्यभार मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी केएन त्रिपाठी और खाद्य सुरक्षा अधिकारी रणधीर यादव के जिम्मे है।

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निलंबन और तबादलों ने बिगाड़ा खेल
विभाग में इस कदर स्टाफ का संकट अचानक पैदा नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे हाल ही में हुए निलंबन और तबादले मुख्य वजह हैं। फरवरी 2026 में विभाग की छवि धूमिल करने और प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान सीज किए गए सामानों को निजी लाभ के लिए गलत तरीके से खुलवाने के गंभीर आरोपों में कार्यालय सहायक के रूप में कार्यरत सेनेटरी सुपरवाइजर गणपति पाठक और कर्मचारी मनोज कुमार गोंड को निलंबित कर दिया गया था।

इसके बाद शासन स्तर से बड़ी कार्रवाई करते हुए खाद्य सुरक्षा अधिकारी लालजीत यादव तथा सहायक आयुक्त कुलदीप सिंह को लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया। रही-सही कसर तब पूरी हो गई जब खाद्य सुरक्षा अधिकारी अरविंद कुमार का हाल ही में प्रयागराज तबादला हो गया। एक साथ इतने अधिकारियों के हटने से विभाग पूरी तरह से मानव संसाधन विहीन हो गया है।

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प्रयोगशाला में 10 नमूने भेजना भी बना आफत
स्टाफ की इस भारी किल्लत से पहले तक विभाग की ओर से हर महीने जिले भर के अलग-अलग बाजारों से 40 से 50 खाद्य पदार्थों के नमूने नियमित रूप से जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जाते थे। नियमित जांच होने से मिलावटखोरों के मन में डर बना रहता था। लेकिन अब हालत यह है कि विभाग के लिए महीने में सिर्फ 10 जरूरी नमूने इकट्ठा करके लैब भेजना भी एक पहाड़ जैसी चुनौती बन गया है।

अधिकारियों की संख्या उंगलियों पर गिनने लायक होने के कारण बाजार में खुलेआम बिक रहे मिलावटी और अमानक खाद्य पदार्थों की निगरानी और उन पर सख्त नियंत्रण रखना नामुमकिन सा होता जा रहा है। इसका सीधा नुकसान चंदौली की आम जनता को उठाना पड़ रहा है, क्योंकि बाजार में मिलावटी सामानों की बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है।

जल्द नई तैनाती की उम्मीद
इस पूरे गंभीर संकट पर जिले का प्रभार संभाल रहे मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी केएन त्रिपाठी का कहना है कि विभाग में स्टाफ की कमी वाकई एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इसकी वजह से रूटीन कामों में बाधा आ रही है। हालांकि, स्थिति को सुधारने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है और उम्मीद है कि जल्द ही नए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति जिले में हो जाएगी। तब तक उपलब्ध स्टाफ के साथ ही काम को प्रभावित नहीं होने देने की पूरी कोशिश की जा रही है।

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