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चंदौली में गंगा का कहर: उफान और कटान से गंगा में समाया 200 साल पुराना पीपल का पेड़

चंदौली में गंगा नदी का जलस्तर 4 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। कुंडा खुर्द में 200 साल पुराना पीपल का पेड़ गंगा में समा गया और कई गांवों में फसलें डूब गई हैं।

 
 

चंदौली में तेजी से बढ़ा गंगा जलस्तर

कुंडा खुर्द में गंगा में समाया पीपल

नियामताबाद और धानापुर में कटान तेज

डूब गईं सैकड़ों बीघा तैयार फसलें

तटीय इलाकों के ग्रामीणों में दहशत

चंदौली जिले  में गंगा नदी का जलस्तर एक बार फिर डराने लगा है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को गंगा का पानी 4 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था। शाम 4 बजे तक जलस्तर 68.04 मीटर तक पहुंच गया, जबकि एक दिन पहले यह 67.06 मीटर था। हालांकि, राहत की बात यह है कि गंगा अभी चेतावनी बिंदु से 2.22 मीटर नीचे बह रही है।

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200 साल पुराना पीपल का पेड़ गंगा में समाया
पानी बढ़ने के साथ-साथ तटीय इलाकों में कटान की समस्या बहुत तेज हो गई है। नियामताबाद ब्लॉक के कुंडा खुर्द गांव में कटान इतनी भीषण हुई कि वहां लगा लगभग 200 साल पुराना ऐतिहासिक पीपल का पेड़ सीधे गंगा नदी में समा गया। पिछले एक हफ्ते से नदी की रफ्तार तेज होने के कारण कुंडा खुर्द गांव में अब तक 20 बीघा से अधिक जमीन गंगा के आगोश में आ चुकी है।

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आधा दर्जन गांवों में कटान से दहशत का माहौल
नियामताबाद ब्लॉक के दुल्हीपुर, कुंडा खुर्द, कुंडा कला, मवई, बहादुरपुर और लेड़वापुर समेत आधा दर्जन गांवों में कटान तेजी से फैल रही है। राजेंद्र यादव, राम करण, महंगू राम और मुकेश जैसे कई ग्रामीणों की उपजाऊ जमीन कटान की भेंट चढ़ चुकी है। गांव के प्रधान भैया लाल यादव का कहना है कि लगातार हो रहे भू-कटान के कारण पूरे गांव के लोग भारी दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं।

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कई गांवों की सैकड़ों बीघा फसलें हुईं जलमग्न
उफान के कारण चहनिया और धानापुर ब्लॉक के घाटों की सीढ़ियां पूरी तरह डूब चुकी हैं। बलुआ, टांडाकला, पकड़ी, महुआरिया, विशुनपुर, डेरवा कला, ढाब और तीरगावां जैसे दर्जनों तटीय गांवों के खेतों तक पानी पहुंच गया है। खेतों में लगी सब्जियां, ज्वार, बाजरा और धान की फसलें जलमग्न हो गई हैं। फसलें बर्बाद होने से स्थानीय किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

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