UP की न्यायिक व्यवस्था के नए युग का आगाज़: चंदौली में 6 जिलों के Integrated Court Complexes का शिलान्यास
उत्तर प्रदेश की न्याय प्रणाली में आज ऐतिहासिक बदलाव आया है। चंदौली समेत 6 जिलों में 'एकीकृत न्यायालय परिसरों' का शिलान्यास किया गया। भारत के मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में शुरू हुई यह योजना आम जनता के लिए न्याय पाना आसान बनाएगी।
चंदौली में न्यायिक सुधार का नया अध्याय
छह जिलों में बनेंगे भव्य एकीकृत कोर्ट परिसर
मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश ने किया शिलान्यास
एक छत के नीचे मिलेंगी सभी कानूनी सुविधाएं
यूपी की अदालतों का होगा डिजिटल कायाकल्प
उत्तर प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक और सुलभ बनाने की दिशा में आज जनपद चंदौली से एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। भारत के मुख्य न्यायमूर्ति (CJI), उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीशों की गरिमामयी उपस्थिति में चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया के लिए 'एकीकृत न्यायालय परिसरों' (Integrated Court Complexes) का भव्य शिलान्यास किया गया। यह कदम प्रदेश की अदालती कार्यवाही को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।

'एक परिसर, संपूर्ण न्याय' की अनूठी अवधारणा
यह पूरी परियोजना 'एक परिसर, संपूर्ण न्याय' के विजन पर आधारित है। वर्तमान में वकीलों और वादियों को अलग-अलग अदालतों और दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। इस नए मॉडल के तहत अब जिला न्यायालय, परिवार न्यायालय, वाणिज्यिक न्यायालय और अन्य ट्रिब्यूनल एक ही छत के नीचे संचालित होंगे। आधुनिक सुविधाओं से लैस इन परिसरों में न केवल न्यायिक अधिकारियों के लिए बेहतर वातावरण होगा, बल्कि आम जनता को भी भटकना नहीं पड़ेगा।

डिजिटल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे पर जोर
शिलान्यास समारोह के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ये कोर्ट कॉम्प्लेक्स केवल ईंट-पत्थर की इमारतें नहीं, बल्कि न्याय के आधुनिक मंदिर होंगे। यहाँ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम, डिजिटल लाइब्रेरी, अधिवक्ताओं के लिए चैंबर और आम नागरिकों के लिए वेटिंग एरिया जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं होंगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि न्याय में देरी को खत्म करने और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
न्यायिक सुशासन की ओर बढ़ते कदम
इस आयोजन ने चंदौली को प्रदेश के न्यायिक मानचित्र पर एक नई पहचान दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन एकीकृत परिसरों के बनने से अदालतों का बोझ कम होगा और मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी। समारोह के अंत में न्यायिक अधिकारियों ने इसे न्यायपालिका और कार्यपालिका के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जो आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बनेगा।
चंदौली जिले में आज एक नया इतिहास लिखा गया है, जब उत्तर प्रदेश के न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए, जनपद चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया में एकीकृत न्यायालय परिसरों (Integrated Court Complexes) का भव्य शिलान्यास किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत के मुख्य न्यायमूर्ति, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और सर्वोच्च न्यायालय के कई वरिष्ठ न्यायाधीश उपस्थित रहे। यह परियोजना 'एक परिसर, संपूर्ण न्याय' की अवधारणा पर आधारित है, जिसका उद्देश्य आम नागरिक को एक ही छत के नीचे सभी कानूनी सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।
आज इस मौके पर भारत के माननीय मुख्य न्यायमूर्ति, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीशों की उपस्थिति में आयोजित यह कार्यक्रम 'एक परिसर, संपूर्ण न्याय' की अवधारणा को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ₹1635 करोड़ की लागत से बनने वाले ये परिसर आधुनिक सुविधाओं, सुरक्षा और वादी-केंद्रित दृष्टिकोण का बेजोड़ उदाहरण होंगे।
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