चंदौली के काला चावल और आदम चीनी को मिलेगा वैश्विक बाजार, किसानों को सिखाए गए कृषि निर्यात के गुर, 145 कृषक हुए शामिल
चंदौली कृषि विज्ञान केंद्र में एपीडा के सहयोग से कृषि निर्यात की संभावनाओं पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें ब्लैक राइस और जीआई टैग प्राप्त आदम चीनी चावल के अंतरराष्ट्रीय विपणन, आधुनिक तकनीक और सरकारी वित्तीय सहायता के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
काला चावल और आदम चीनी का होगा निर्यात
एपीडा डीजीएम ने स्वरोजगार पर दिया जोर
धान की उन्नत प्रजातियों और डीएसआर तकनीक की जानकारी
महिला किसानों और एफपीओ सदस्यों की सक्रिय भागीदारी
बैंकों से वित्तीय सहयोग के लिए एलडीएम का आश्वासन
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र चंदौली में सोमवार को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन 'एपीडा' के सहयोग से आयोजित इस संगोष्ठी का मुख्य विषय “कृषि निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा” रहा। इस कार्यक्रम में जनपद के प्रगतिशील किसानों, महिला कृषकों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कुल 145 प्रतिभागियों में 85 पुरुष और 60 महिला किसानों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया।
ब्लैक राइस और आदम चीनी के निर्यात पर जोर
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए केवीके अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने चंदौली की पहचान बन चुके काला चावल (ब्लैक राइस) और जीआई टैग प्राप्त 'आदम चीनी' चावल की विशेषताओं को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इन उत्पादों के साथ-साथ यहाँ की सब्जियों और फलों में निर्यात की अपार संभावनाएँ हैं। डॉ. रघुवंशी ने किसानों को निर्यात के अनुकूल गुणवत्तापूर्ण उत्पादन (Export Quality Production) अपनाने के लिए प्रेरित किया ताकि वैश्विक बाजार में चंदौली के उत्पादों की मांग बढ़ सके।
स्वरोजगार और मूल्य संवर्धन की दिशा में कदम
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित एपीडा के डीजीएम डॉ. सी. बी. सिंह ने केंद्र सरकार की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार चाहती है कि युवा और महिलाएँ अपने गाँवों में ही स्वरोजगार प्राप्त करें। उन्होंने समूहों के माध्यम से मूल्य संवर्धित उत्पाद (Value Added Products) तैयार करने और छोटे उद्योग स्थापित करने पर बल दिया। उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभ के बारे में भी विस्तार से बताया। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय दक्षिण एशिया चावल अनुसंधान केंद्र (इरी) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विवेक कुमार और डॉ. अभयदीप गौतम ने धान की नई प्रजातियों और 'डीएसआर तकनीक' (DSR Technique) के लाभ साझा किए, जिससे कम लागत में अधिक पैदावार संभव है।
वित्तीय सहायता और उद्यानिकी फसलों का विपणन
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. शैलेंद्र देव दुबे ने मिर्च के निर्यात पर विशेष चर्चा की, जबकि अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) सुनील कुमार भगत ने किसानों को उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक वित्तीय प्रक्रियाओं की जानकारी दी। एलडीएम ने आश्वासन दिया कि बैंक जनपद के मेहनती किसानों को पूरा वित्तीय सहयोग प्रदान करेंगे। डॉ. चंदन सिंह ने मृदा परीक्षण की महत्ता और मनीष सिंह ने उद्यानिकी फसलों की बाजार संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
किसानों ने साझा किए अपने अनुभव
संगोष्ठी के दौरान शशिकांत राय, अजय सिंह, पूजा कुमारी और प्रियंका मौर्या जैसे कई प्रगतिशील किसानों ने ब्लैक राइस के उत्पादन और विपणन से संबंधित अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. अमित सिंह ने किया। अंत में, आधुनिक तकनीकों और निर्यात संबंधी जानकारियों को पाकर किसानों ने हर्ष व्यक्त किया और इसे खेती को लाभप्रद बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
Tags
चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*








