कृषि विज्ञान केंद्र में 'एक पेड़ माँ के नाम' कार्यक्रम का आगाज, वीसी डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप बोले- खुद बीज बनाएं किसान
चन्दौली कृषि विज्ञान केंद्र में वन महोत्सव और 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत भव्य कार्यक्रम हुआ। मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने पौधारोपण किया और किसानों को वैज्ञानिक तरीके से बीज उत्पादन करने की सलाह दी।
कृषि विज्ञान केंद्र में वन महोत्सव
कुलपति ने किया भव्य वृक्षारोपण अभियान
वैज्ञानिक पद्धति से बीज बनाने की सलाह
प्राकृतिक और जैविक खेती की सराहना
कार्यक्रम में जुटे 105 प्रगतिशील किसान
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा संचालित चन्दौली के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में वन महोत्सव और "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि और विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर और परिसर में फलदार पौधों का रोपण करके की।
इस मौके पर कुलपति ने पर्यावरण को बचाने के लिए हर नागरिक से अपनी मां के नाम पर कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने की भावनात्मक अपील की। इसके साथ ही उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र की विभिन्न इकाइयों का बारीकी से निरीक्षण भी किया।

बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनें किसान: डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप
कार्यक्रम में मौजूद प्रगतिशील किसानों को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने एक बड़ा आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारे किसानों को अब खुद ही अच्छी और गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनना होगा। अगर किसान कृषि वैज्ञानिकों की देखरेख में वैज्ञानिक तरीके से अपने खेतों में ही बीज तैयार करेंगे, तो बाजार से महंगे बीज खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इससे खेती की लागत में भारी कमी आएगी, समय पर अच्छे बीज मिलेंगे और सीधे तौर पर किसानों का मुनाफा और उनकी आय भी बढ़ेगी। उन्होंने केंद्र के वैज्ञानिकों को निर्देश दिया कि वे 'पार्टिसिपेटरी मोड' (साझा भागीदारी) में किसानों के साथ मिलकर इस मुहिम को और तेजी से आगे बढ़ाएं।
प्राकृतिक खेती की सराहना, 'ब्रह्मास्त्र' और 'जीवामृत' पर जोर
निरीक्षण के दौरान कुलपति ने केंद्र में चल रही प्राकृतिक खेती (नैचुरल फार्मिंग) की तकनीकों को देखा और वैज्ञानिकों की पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि आज के समय में रसायन मुक्त खेती बहुत जरूरी है। उन्होंने केंद्र को निर्देश दिया कि वे किसानों के बीच जीवामृत, घनजीवामृत, ब्रह्मास्त्र और अग्नास्त्र जैसे शुद्ध जैविक इनपुट्स के निर्माण और उनके इस्तेमाल के लाइव प्रदर्शन को और ज्यादा बढ़ावा दें।
इसके अलावा उन्होंने केंद्र की नर्सरी को और ज्यादा मजबूत करने के लिए कहा, ताकि किसानों को बेहद कम दामों पर फलदार और वानिकी के उत्तम पौधे मिल सकें। इस मौके पर प्रसार निदेशक डॉ. राम बटुक सिंह ने विश्वविद्यालय के तहत चलने वाले 25 कृषि विज्ञान केंद्रों की उपलब्धियां साझा कीं।
चन्दौली के 105 प्रगतिशील किसानों ने लिया हिस्सा
कृषि विज्ञान केंद्र, चन्दौली के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने केंद्र की प्रगति रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि केंद्र लगातार ट्रेनिंग प्रोग्राम्स और नई तकनीकों को खेतों तक पहुँचाने के काम में मुस्तैदी से लगा हुआ है। इस बड़े आयोजन में जिला कृषि अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, उपनिदेशक कृषि और इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में वैज्ञानिक डॉ. अभयदीप गौतम, डॉ. अमित सिंह, डॉ. प्रतीक सिंह, श्री मनीष सिंह और वैज्ञानिक डॉ. चंदन सिंह (जिन्होंने मंच संचालन और धन्यवाद ज्ञापन किया) के साथ-साथ प्रगतिशील किसान श्री दीनानाथ श्रीवास्तव, श्री रतन सिंह, श्री शशिकांत राय, श्री रमेश सिंह और श्री अजय सिंह सहित कुल 105 किसानों ने सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
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