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सावधान! चंदौली में मंगलवार से अनिश्चितकाल के लिए बंद हो सकती है रजिस्ट्री, वकीलों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

चंदौली में ई-रजिस्ट्री और निजीकरण के विरोध में सिविल बार एसोसिएशन के नेतृत्व में वकीलों ने जमकर प्रदर्शन किया। सोमवार को सदर निबंधक कार्यालय बंद कराने के बाद वकीलों ने मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल की बड़ी चेतावनी दी है।

 
 

ई-रजिस्ट्री के खिलाफ वकीलों का प्रदर्शन

सदर निबंधक कार्यालय कराया गया बंद

मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

धारा 56 और 59 ऑनलाइन करने की मांग

तहसीलों में भी दिखा व्यापक असर

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही ई-रजिस्ट्री व्यवस्था और रजिस्ट्री प्रक्रिया के कथित निजीकरण के खिलाफ चंदौली में वकीलों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सोमवार को सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने जिला मुख्यालय स्थित सदर निबंधक कार्यालय (रजिस्ट्री दफ्तर) पर जोरदार हंगामा किया। वकीलों ने न सिर्फ सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, बल्कि कामकाज को पूरी तरह ठप कराते हुए दफ्तर भी बंद करा दिया।

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क्या है वकीलों की मांग और नाराजगी?
प्रदर्शन कर रहे वकीलों का साफ कहना है कि सरकार ई-रजिस्ट्री के बहाने इस पूरी व्यवस्था का निजीकरण करने की तैयारी में है। इससे आम जनता और वकीलों दोनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार को यह जिद छोड़नी होगी। हमारी मांग है कि ई-रजिस्ट्री लागू करने से पहले धारा 56 और 59 से जुड़े सभी पुराने सरकारी अभिलेखों (दस्तावेजों) को पूरी तरह ऑनलाइन किया जाए और उनमें मौजूद गलतियों को सुधारा जाए। इसके बाद ही कोई नई व्यवस्था लाई जाए।

मंगलवार से अनिश्चितकालीन बंदी की बड़ी चेतावनी
अधिवक्ताओं ने सरकार को दो टूक लहजे में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र होगा। बार अध्यक्ष ने ऐलान किया कि मंगलवार से पूरे जिले में अनिश्चितकाल के लिए रजिस्ट्री का काम पूरी तरह बंद करा दिया जाएगा। सोमवार को हुए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने अपनी मांगों का एक ज्ञापन भी अधिकारियों को सौंपा और साफ कहा कि वर्तमान स्वरूप में ई-रजिस्ट्री किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है।

अधिकारियों ने दी सफाई, तहसीलों में भी दिखा असर
इस पूरे हंगामे को लेकर सदर के उप निबंधन अधिकारी तेज बहादुर ने अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने बताया कि अधिवक्ताओं को समझाने का प्रयास किया गया है कि किसी भी तरह का निजीकरण नहीं हो रहा है। पुरानी व्यवस्था ही चलेगी, बस जनता की सहूलियत के लिए एक नई और आधुनिक तकनीक को जोड़ा जा रहा है। हालांकि, वकीलों पर इस सफाई का कोई असर नहीं दिखा। जिला मुख्यालय के साथ-साथ जिले की दूसरी तहसीलों में भी इस विरोध की गूंज सुनाई दी, जिससे रजिस्ट्री कराने आए आम लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

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