चंदौली में 14 मार्च को सजेगी राष्ट्रीय लोक अदालत: सुलह-समझौते से निपटेंगे हजारों लंबित मामले
चंदौली जनपद में आगामी 14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया जाएगा। सिविल जज डॉ. इंदु रानी ने नियामताबाद में लीगल एड क्लिनिक का निरीक्षण करते हुए आम जन को आपसी समझौते से मुकदमे निपटाने के लिए प्रेरित किया।
14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत
नियामताबाद लीगल एड क्लिनिक का निरीक्षण
सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण
चेक बाउंस और राजस्व वाद निपटेंगे
सचिव डॉ. इंदु रानी की खास अपील
चंदौली जनपद के नागरिकों को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाने के उद्देश्य से आगामी 14 मार्च 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार, 7 मार्च को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पूर्णकालिक सचिव डॉ. इंदु रानी ने नियामताबाद ब्लॉक स्थित लीगल एड क्लिनिक का औचक निरीक्षण किया और आम जनता को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया।
लीगल एड क्लिनिक का निरीक्षण और जागरूकता
निरीक्षण के दौरान सचिव डॉ. इंदु रानी ने लीगल एड क्लिनिक के कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों और फरियादियों से सीधा संवाद करते हुए क्लिनिक की उपयोगिता के बारे में विस्तार से चर्चा की। सचिव महोदया ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के दिशा-निर्देशों की जानकारी देते हुए बताया कि लीगल एड क्लिनिक समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को निशुल्क कानूनी सहायता और परामर्श प्रदान करने का एक सशक्त माध्यम है।
14 मार्च को लोक अदालत में इन मामलों का होगा निस्तारण
सचिव डॉ. इंदु रानी ने आगामी 14 मार्च को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस अदालत में लंबित विवादों को बिना किसी अदालती फीस के सुलह-समझौते के आधार पर समाप्त किया जा सकता है। लोक अदालत में मुख्य रूप से निम्नलिखित मामलों का निस्तारण होगा:
- अपराधिक एवं दीवानी: शमनीय दाण्डिक वाद और सिविल वाद।
- वित्तीय मामले: चेक बाउंस (Section 138), बैंक रिकवरी और बीमा वाद।
- पारिवारिक विवाद: भरण-पोषण और वैवाहिक संबंधी मामले।
- सरकारी कर व राजस्व: राजस्व वाद, चकबंदी वाद, जलकर एवं नगरपालिका कर निर्धारण के विरुद्ध अपील।
- उपभोक्ता सेवाएं: बिजली, टेलीफोन, श्रम और मोटर यान अधिनियम संबंधी विवाद।
आपसी समझौते से न्याय की अपील
डॉ. इंदु रानी ने आम जन से अपील की कि जो लोग वर्षों से कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहे हैं, वे इस अवसर का लाभ उठाकर अपने मुकदमों को हमेशा के लिए समाप्त कर सकते हैं। लोक अदालत के माध्यम से होने वाले फैसले की कोई अपील नहीं होती, जिससे दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट खत्म होती है और समय व धन की बचत होती है।
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