चंदौली के कृषि विज्ञान केंद्र में 44 'कृषि सखियों' को मिला प्राकृतिक खेती का मंत्र, 5 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
चंदौली के कृषि विज्ञान केंद्र में 44 कृषि सखियों के लिए पांच दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। विशेषज्ञ जीवामृत, बीजामृत और कीट नियंत्रण की नवीनतम तकनीकों के बारे में जानकारी देंगे।
44 कृषि सखियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की पहल
जीवामृत और बीजामृत बनाने की तकनीक
प्राकृतिक खेती के महत्व पर मंथन
चंदौली जनपद स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत एक अत्यंत महत्वपूर्ण पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम वर्ष 2025-26 के द्वितीय मॉड्यूल के रूप में आयोजित किया गया है। 9 मार्च 2026 को शुरू हुए इस सत्र में जनपद के चहनियां और धानापुर विकास खंड से चुनी गई कुल 44 कृषि सखियों और कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (CRP) ने सहभागिता की।
प्राकृतिक खाद बनाने की विधि पर जोर
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों से दूर कर प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करना है। कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने कृषि सखियों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और अग्निआस्त्र बनाने की विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन दिखाया। इन प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग फसलों की उर्वरता बढ़ाने और मिट्टी के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में कैसे किया जाए, इस पर विस्तार से चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने साझा किए खेती के टिप्स
उप कृषि निदेशक भीमसेन ने सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य प्राकृतिक खेती का ही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल कम लागत वाली है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी वरदान है। वहीं, केवीके अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने सब्जी, सरसों और गन्ने की फसलों में जैविक विधि अपनाने के लाभ बताए। वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार सिंह ने फसलों में लगने वाले रोगों को प्राकृतिक दवाओं से नियंत्रित करने का मार्गदर्शन दिया।
खेती की दिशा में बड़ा बदलाव
कार्यक्रम के दौरान डॉ. चंदन सिंह ने प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए क्यों और कैसे प्राकृतिक खेती अपनानी चाहिए। प्रशिक्षण सत्र में डॉ. मनीष सिंह, मानसिंह कुशवाहा, अरुण कुमार यादव और आर.पी. पांडेय सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कृषि सखियों का यह दल अब अपने-अपने क्लस्टर में अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक करेगा। चंदौली के इस पहल से जनपद में जैविक उत्पाद को बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि होने की प्रबल संभावना है।
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