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घोसवां ड्रेन की खुदाई के बीच गरमाया मुद्दा, रेलवे ने नहीं जागा तो 50 गांवों को बचाने के लिए खुद करेंगे खुदाई

चंदौली के धीना क्षेत्र में घोसवां ड्रेन नंबर-2 की खुदाई के अंतिम चरण में रेलवे अतिक्रमण का गंभीर मुद्दा गरमा गया है। किसान नेता दरोगा राय ने रेलवे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है, जिसके बाद बंधी डिवीजन ने कड़ा रुख अपनाया है।

 
 

घोसवां ड्रेन खुदाई का कार्य अंतिम चरण में

किसान नेता दरोगा राय ने उठाया मुद्दा

रेलवे विभाग पर डेढ़ मीटर अतिक्रमण का आरोप

क्षेत्र के 50 गांवों की जल निकासी प्रभावित

अधिशासी अभियंता सुरेश चंद्र ने दिया आश्वासन

चंदौली जिले के बरहनी विकासखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले घोसवां ड्रेन नंबर-2 की करीब 15 किलोमीटर लंबी साफ-सफाई और खुदाई का कार्य इन दिनों अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। ड्रेन की खुदाई का काम पूरा होने ही वाला था कि इसी बीच प्रसिद्ध किसान नेता दरोगा राय ने रेलवे विभाग द्वारा इस ड्रेन पर किए गए कथित अतिक्रमण का एक बड़ा मुद्दा उठाकर प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है।

किसान नेता ने इस समस्या को प्रमुखता से सामने रखते हुए बताया कि रेलवे की इस मनमानी के कारण क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था पिछले कई वर्षों से पूरी तरह ध्वस्त पड़ी है, जिसका खामियाजा स्थानीय किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

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रेलवे ने डेढ़ मीटर तक दबाई ड्रेन, 50 गांव प्रभावित
मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए किसान नेता दरोगा राय ने बताया कि धीना रेलवे फाटक से लेकर सिकठा गांव तक लगभग दो किलोमीटर की कुल लंबाई में, रेलवे लाइन के ठीक किनारे स्थित इस ड्रेन पर रेलवे विभाग द्वारा करीब डेढ़ मीटर तक अवैध रूप से अतिक्रमण कर लिया गया है।

इस अतिक्रमण के कारण घोसला ड्रेन की वास्तविक चौड़ाई बहुत कम हो गई है। नतीजतन, मानसून के समय क्षेत्र के लगभग 50 गांवों की जल निकासी वर्षों से बुरी तरह प्रभावित हो रही है और किसानों की फसलें जलभराव के कारण हर साल बर्बाद हो जाती हैं।

वर्ष 2023 के लिखित समझौते की उड़ीं धज्जियां
किसान नेता ने पूर्व के घटनाक्रमों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2023 में इस समस्या को लेकर किसानों और रेलवे विभाग के अवर अभियंता (जेई) के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच बकायदा एक लिखित समझौता हुआ था, जिसमें रेलवे ने अपनी गलती मानते हुए सहमति जताई थी कि वे ड्रेन के अतिक्रमण वाले हिस्से को जल्द ही खुद हटा लेंगे। दरोगा राय का आरोप है कि इस लिखित समझौते के बावजूद आज तक रेलवे विभाग द्वारा जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। किसानों ने इस संबंध में कई बार वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों से लिखित शिकायतें भी कीं, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही।

अधिशासी अभियंता सुरेश चंद्र आजाद ने लिया कड़ा संज्ञान
इस पूरे गंभीर मामले को लेकर जब बंधी डिवीजन के अधिशासी अभियंता (एक्सियन) सुरेश चंद्र आजाद से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि किसानों और रेलवे विभाग के बीच लिखित समझौता होने के बावजूद अब तक वहां से अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में घोसला ड्रेन की खुदाई का सरकारी कार्य तेजी से जारी है। किसानों द्वारा दर्ज कराई गई जायज आपत्ति को ध्यान में रखते हुए, सिंचाई विभाग अब ड्रेन को उसकी मूल चौड़ाई में पूरी तरह बहाल करने की विधिक प्रक्रिया अपनाने जा रहा है।

रेलवे नहीं हटाएगा, तो सिंचाई विभाग खुद करेगा वास्तविक खुदाई
अधिशासी अभियंता सुरेश चंद्र आजाद ने बेहद कड़े शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि यदि रेलवे विभाग अपने स्तर पर इस अतिक्रमण को तुरंत नहीं हटाता है, तो सिंचाई विभाग ड्रेन के नक्शे और उसकी वास्तविक चौड़ाई के अनुसार ही अपनी खुदाई का काम आगे बढ़ाएगा। विभाग ड्रेन को काटकर हर हाल में उसके मूल स्वरूप में वापस लाएगा, ताकि क्षेत्र के 50 गांवों की जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह सुचारु हो सके। उन्होंने भरोसा जताया कि इस कदम से आने वाले दिनों में क्षेत्र के किसानों को जलभराव की बड़ी समस्या से हमेशा के लिए राहत मिल जाएगी।

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