किसान विकास मंच की चेतावनी: धान फीडिंग की तिथि नहीं बढ़ी तो अधर में लटकेगा हजारों किसानों का भुगतान
चंदौली में धान खरीद पोर्टल की अंतिम तिथि नजदीक आने से किसानों की धड़कनें तेज हैं। तकनीकी दिक्कतों और पोर्टल के बार-बार बंद होने से हजारों कुंतल धान की फीडिंग अटक गई है। क्या प्रशासन समय सीमा बढ़ाएगा? विस्तार से पढ़ें।
पोर्टल फीडिंग की अंतिम तिथि ने बढ़ाई किसानों की बेचैनी
तकनीकी बाधाओं के कारण धान फीडिंग प्रक्रिया हुई बाधित
किसान विकास मंच ने डीएम को सौंपा मांग पत्र
डिप्टी आरएमओ की अनुपस्थिति से किसानों में भारी रोष
चंदौली जिले में धान की सरकारी खरीद प्रक्रिया अब अपने निर्णायक मोड़ पर है, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती और तकनीकी खामियों ने अन्नदाताओं की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। धान खरीद पोर्टल पर डेटा फीडिंग की अंतिम तिथि महज एक दिन शेष रहने के बावजूद, एक बड़ी आबादी ऐसी है जिनका धान तो बिक चुका है, लेकिन रिकॉर्ड में उनकी फीडिंग अब तक शून्य है।
पोर्टल की तकनीकी खामियों से किसान त्रस्त
किसानों का आरोप है कि सरकारी पोर्टल अपनी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर रहा है। पोर्टल को कभी 50 कुंतल, तो कभी 100 से 200 कुंतल की सीमित फीडिंग के लिए ही खोला जा रहा है। अधिकांश समय पोर्टल 'सर्वर डाउन' या पूरी तरह बंद मिल रहा है। इस अनियमितता के कारण पर्याप्त मात्रा में धान की फीडिंग नहीं हो पा रही है। किसानों को डर है कि यदि समय रहते पोर्टल पर डेटा अपलोड नहीं हुआ, तो उनका भुगतान लंबे समय के लिए फंस सकता है।
जिलाधिकारी से लगाई मदद की गुहार
समस्या की गंभीरता को देखते हुए किसान विकास मंच के कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग से मुलाकात की। कार्यकर्ताओं ने एक ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए पोर्टल फीडिंग की अंतिम तिथि को मार्च महीने में कम से कम चार दिन के लिए और बढ़ाया जाए। संगठन मंत्री राम अवध सिंह ने कहा कि पीक सीजन में अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए ताकि किसानों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
अधिकारियों की अनुपस्थिति पर फूटा गुस्सा
ज्ञापन देने के दौरान किसानों का आक्रोश उस समय बढ़ गया जब वे डिप्टी आरएमओ कार्यालय पहुंचे। बताया जा रहा है कि शाम साढ़े चार बजे तक इंतजार करने के बाद भी डिप्टी आरएमओ से मुलाकात नहीं हो सकी। किसान विकास मंच ने मांग की है कि धान खरीद जैसे महत्वपूर्ण समय में संबंधित विभाग के अधिकारियों की ड्यूटी अन्य गैर-विभागीय कार्यों में न लगाई जाए। अधिकारी के न मिलने से दूर-दराज से आए किसान निराश होकर वापस लौट गए।
मिलरों और साधनहीन किसानों की दोहरी मार
खबर है कि कई साधनहीन किसान, जो क्रय केंद्रों तक नहीं पहुंच सके, उन्होंने अपना धान राइस मिलरों को दे दिया है। पोर्टल बंद होने से अब उन मिलरों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है। फीडिंग न होने की स्थिति में मिलरों और किसानों, दोनों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इस दौरान रणजीत सिंह, सुशील पांडेय, तौसीफ खान, सत्यप्रकाश मुनी और उपेंद्र सिंह समेत दर्जनों किसान नेता उपस्थित रहे। किसानों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
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