जिले का पहला ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टलMovie prime

चंदौली में बिजली का संकट: 18 घंटे आपूर्ति का दावा फेल, भीषण गर्मी में बेहाल हो रहे 2 लाख उपभोक्ता

भीषण गर्मी के बीच चंदौली में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। विभाग 18 घंटे बिजली देने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत में हर दो घंटे पर बिजली कट रही है, जिससे 300 गांवों के दो लाख से ज्यादा लोग परेशान हैं।

 
 

चंदौली में बिजली आपूर्ति का गहरा संकट

300 गांवों के लोग गर्मी से बेहाल

हर दो घंटे पर बिजली कटौती जारी

ओवरलोड और लोकल फाल्ट से परेशानी

दो लाख उपभोक्ता बिजली समस्या से जूझ रहे

चंदौली में बिजली संकट: '18 घंटे' के दावे और अंधेरे की हकीकत के बीच पिस रहे उपभोक्ता, अफसर करते हैं बहानेबाजी

 चंदौली जिला इस वक्त बिजली के गंभीर संकट से जूझ रहा है। बिजली विभाग द्वारा किए जा रहे '18 घंटे' की निर्बाध आपूर्ति के दावे हकीकत के धरातल पर पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। जिले के करीब 300 गांवों में रहने वाले दो लाख से अधिक उपभोक्ता बिजली की लचर व्यवस्था के कारण भारी उमस और गर्मी में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। स्थिति इतनी बदतर है कि रात के समय भी चैन से सोना मुहाल हो गया है।

रात भर जारी रहता है कटौती का सिलसिला
सरकारी दावों और जमीन पर मौजूद हकीकत के बीच का अंतर शाम सात बजे के बाद साफ तौर पर देखने को मिलता है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बिजली सुचारू है, लेकिन स्थानीय उपभोक्ताओं की मानें तो शाम 7 बजे के बाद से हर दो घंटे पर बिजली कटौती का सिलसिला शुरू हो जाता है। बिजली केवल पांच मिनट के लिए आती है और फिर गुल हो जाती है। यह क्रम पूरी रात चलता है। इस बार-बार की कटौती ने आम लोगों की दिनचर्या को अस्त-व्यस्त कर दिया है। बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग इस भीषण गर्मी में बिना पंखे और कूलर के रात बिताने को मजबूर हैं।

प्रभावित क्षेत्र के उपभोक्ताओं का दर्द
जिले के सकलडीहा, नौगढ़, टांडाकला, कमालपुर, इलिया और कंदवा क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां के 300 से अधिक गांवों में बिजली की अघोषित कटौती, लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। उपभोक्ता शिकायत कर रहे हैं कि वे समय पर बिजली बिल का भुगतान कर रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।

स्थानीय निवासी लोगों का कहना है कि जैसे ही रात में भोजन का समय होता है या सोने का वक्त आता है, बिजली गायब हो जाती है। घर के अंदर उमस इतनी ज्यादा है कि लोग बाहर टहलने को मजबूर हैं। वहीं,  असना इलाके के अन्य उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली विभाग न केवल उनकी बात अनसुनी कर रहा है, बल्कि शिकायतों के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।

विभाग का तर्क और तकनीकी समस्याएं
बिजली विभाग की तरफ से इन समस्याओं के पीछे कई तकनीकी कारण गिनाए जा रहे हैं। उपखंड अधिकारी संतोष कुमार के अनुसार, रोस्टिंग के कारण रात में बिजली काटी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जितनी बिजली ऊपर से मिल रही है, उतनी ही आगे दी जा रही है। विभाग के मुताबिक, लोकल फॉल्ट, ओवरलोड फीडर, ट्रांसफार्मर की कम क्षमता और पेड़ों की टहनियों का तारों से टकराना ट्रिपिंग का मुख्य कारण है।

अधिकारियों का तर्क है कि जैसे ही सूचना मिलती है, टीम उसे ठीक करने का प्रयास करती है ताकि उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशानी न हो। हालांकि, विभागीय अधिकारियों के ये दावे ग्रामीणों के गले नहीं उतर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कर्मचारी केवल कागजों पर 'सब ठीक है' की रिपोर्ट दे रहे हैं, जबकि असलियत में गांवों में बिजली का बुरा हाल है।

अलग-अलग उपकेंद्रों की अलग-अलग कहानी
जिले के विभिन्न उपकेंद्रों की स्थिति पर नजर डालें तो हर जगह समस्याओं का अंबार है। कमालपुर उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में फीडर पर ओवरलोड के कारण आए दिन बिजली ट्रिप हो रही है। इसी तरह, टांडकला क्षेत्र के सरोली, महमूदपुर, मारूफपुर और सोनबरसा सहित कई गांवों में सुबह 6 बजे बिजली कटने के बाद 9 से 10 बजे के बीच आपूर्ति बहाल होती है। फिर दोपहर में ट्रिपिंग का खेल शुरू हो जाता है।

ग्रामीणों ने बताया कि जमुनिया क्षेत्र में तो दिन हो या रात, बिजली के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं। स्थानीय नेता और जागरूक नागरिक अरुण सिंह भदखारी और अनिल यादव कंजेहरा जैसे लोगों का कहना है कि सरकार बिजली देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन हकीकत में 18 घंटे बिजली का वादा सिर्फ कागजों तक सीमित है। लोगों को बिजली की आपूर्ति न के बराबर मिल रही है, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।

कहा जा रहा है कि अभी मई और जून तक भीषण गर्मी का प्रकोप अभी जारी रहने वाला है, ऐसे में विभाग को जल्द ही अपने बुनियादी ढांचे में सुधार करना होगा। केवल रोस्टिंग का हवाला देकर जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता।

ओवरलोड फीडरों को अपग्रेड करना, पुरानी लाइनों को बदलना और पेड़ों की छंटाई करना तत्काल प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि विभाग जल्द ही अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं करता है, तो जनता का गुस्सा सड़कों पर उतर सकता है। दो लाख उपभोक्ताओं की यह समस्या केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक विफलता है, जिसे समय रहते सुधारना ही एकमात्र विकल्प है। क्या बिजली विभाग आम जनता की इन समस्याओं का स्थायी समाधान कर पाएगा? यह बड़ा सवाल अभी भी अनसुलझा है।

चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*