महंगी किताबों और ड्रेस बेचने वाले स्कूल संचालक हो जाएं अलर्ट, लालच व चालाकी से रद्द हो जाएगी स्कूल की मान्यता
चंदौली में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ बीएसए ने कमर कस ली है। महंगी किताबों और चिन्हित दुकानों से ड्रेस खरीदने के दबाव पर विभाग ने सख्त नोटिस जारी करते हुए स्कूल संचालकों को कड़ी चेतावनी दी है।
निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक
महंगी किताबों के खिलाफ बीएसए सख्त
अभिभावकों पर आर्थिक बोझ का विरोध
चिन्हित दुकानों से ड्रेस खरीद पर प्रतिबंध
मान्यता रद्द होने की मिली चेतावनी
चंदौली जिले में शिक्षा विभाग ने निजी विद्यालयों की मनमानी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जनपद के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 17 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण और सख्त फरमान जारी किया था, जो जनपद के सभी अशासकीय मान्यता प्राप्त एवं वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधकों और प्राचार्यों के लिए खास तौर पर है। यह कदम लगातार मिल रही अभिभावकों और मीडिया की शिकायतों के बाद उठाया गया है। पुराने पत्र की याद दिलाते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कुमार ने सबको एक बार फिर से चेतावनी दी है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त शिकायतों के अनुसार, कुछ निजी विद्यालय छात्रों पर सीधे तौर पर दबाव बना रहे थे कि वे केवल निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें ही खरीदें। साथ ही, स्कूल प्रशासन ने विशेष दुकानों को चिन्हित कर रखा है, जहाँ से ड्रेस और अन्य शिक्षण सामग्री खरीदना अनिवार्य कर दिया गया था। अभिभावकों का आरोप था कि इससे उन पर आर्थिक बोझ अत्यधिक बढ़ रहा है। शिक्षा विभाग ने इस प्रवृत्ति को बच्चों और अभिभावकों के हितों के खिलाफ माना है।
सख्त कार्रवाई की चेतावनी
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी विद्यालय द्वारा विशेष प्रकाशन की महंगी किताबें थोपना नियम विरुद्ध है। यदि कोई स्कूल प्रबंधन किसी विशेष दुकान को चिन्हित कर छात्रों या अभिभावकों को वहां से खरीदारी के लिए बाध्य करता है, तो इसे गंभीर अनियमितता के रूप में देखा जाएगा। विभाग ने साफ किया है कि शिक्षा संस्थानों का प्राथमिक उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, न कि निजी लाभ के लिए अभिभावकों का आर्थिक शोषण करना।
मान्यता रद्द करने तक की चेतावनी
शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालय संचालकों को चेतावनी दी है कि यदि जांच के दौरान कोई भी स्कूल इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो संबंधित विद्यालय के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसमें विद्यालय की मान्यता प्रत्याहरण (रद्द करने) तक की कार्यवाही शामिल है। विभाग के इस फैसले से निजी स्कूलों में हड़कंप मच गया है, जबकि अभिभावकों ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे राहत भरा बताया है। शासन के नए निर्देशों के अनुसार, अब अभिभावकों को खुली बाजार व्यवस्था के तहत किताबें व ड्रेस खरीदने की पूरी स्वतंत्रता होगी।
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