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RTE Admission 2026: कॉन्वेंट स्कूलों में प्रवेश के नियम बदले, अब केवल ग्राम पंचायत के स्कूलों में मिलेगा प्रवेश, 17 जनवरी से आवेदन

चंदौली में आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिले के नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है। अब बच्चे केवल अपनी ग्राम पंचायत या मोहल्ले के स्कूल में ही प्रवेश पा सकेंगे। 17 जनवरी से 4,100 सीटों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी।

 

आरटीई दाखिले में एक किलोमीटर की दूरी का विकल्प खत्म

केवल अपनी ग्राम पंचायत के स्कूलों में होगा आवेदन

चंदौली के 527 निजी स्कूलों में 25% सीटें आरक्षित

17 जनवरी 2026 के बाद खुलेगा ऑनलाइन पोर्टल

4,100 सीटों पर गरीब बच्चों को मिलेगा मुफ्त प्रवेश

चंदौली जिले में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत गरीब और अलाभित वर्ग के बच्चों को निजी व कॉन्वेंट स्कूलों में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया में शासन ने क्रांतिकारी बदलाव किया है। अब तक चली आ रही एक किलोमीटर के दायरे वाले स्कूल चुनने की सुविधा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार, अब छात्र केवल अपनी ग्राम पंचायत या शहरी क्षेत्र के अपने वार्ड (मुहल्ले) में स्थित स्कूलों के लिए ही आवेदन कर सकेंगे।

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527 स्कूलों में 4,100 सीटों पर होगा दाखिला
जिला प्रशासन ने नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कमर कस ली है। जिले में कुल 527 निजी और कॉन्वेंट स्कूलों को चिन्हित किया गया है, जहाँ 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। इस वर्ष जिले में कुल 4,100 सीटों पर पात्र बच्चों को प्रवेश दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सचिन कुमार ने बताया कि आवेदन की प्रक्रिया 17 जनवरी 2026 के बाद ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से शुरू कर दी जाएगी।

बदलाव की मुख्य वजह: पारदर्शिता और विवादों का अंत
शासन द्वारा नियमों में इस बदलाव का मुख्य कारण पिछले वर्षों में अभिभावकों और स्कूल प्रबंधनों के बीच होने वाले विवादों को बताया जा रहा है। अक्सर देखा गया था कि दूरी और पसंद के स्कूलों को लेकर खींचतान होती थी और कई बार स्कूल प्रबंधन प्रवेश में बाधा उत्पन्न करते थे। नई व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि यह सुनिश्चित हो सकेगा कि बच्चा अपने निवास के सबसे निकटतम उपलब्ध स्कूल में शिक्षा प्राप्त करे।

अभिभावकों में चिंता, विभाग ने दी सफाई
जहाँ विभाग इसे एक बेहतर नियंत्रण और निष्पक्ष प्रक्रिया मान रहा है, वहीं कई अभिभावकों ने इस पर चिंता जताई है। उनका तर्क है कि यदि उनकी ग्राम पंचायत में कोई उत्कृष्ट कॉन्वेंट स्कूल नहीं है, तो वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने से वंचित रह जाएंगे। हालांकि, बीएसए ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था शासन के निर्देशों पर आधारित है और इसका उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाना है ताकि गरीब परिवारों को आवेदन के समय भटकना न पड़े।

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