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सदर कोतवाली में टूटा बिरादरी का वर्चस्व, जाति नहीं काबिलियत बनी तैनाती का पैमाना, बिंदेश्वरी पांडेय को मिली कमान

चंदौली सदर कोतवाली में वर्षों पुरानी जातिगत वर्चस्व की परंपरा को तोड़ते हुए पुलिस कप्तान ने नई कार्यसंस्कृति की शुरुआत की है। सात इंस्पेक्टरों के कड़े इंटरव्यू के बाद बिंदेश्वरी पांडेय को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

 

सदर कोतवाली में वर्षों पुराना बिरादरी वर्चस्व खत्म

सात इंस्पेक्टरों के साक्षात्कार के बाद हुई तैनाती

सेवा रिकॉर्ड और फिटनेस के आधार पर चयन

भ्रष्टाचार के आरोपी और अनफिट दावेदार बाहर

तेजतर्रार इंस्पेक्टर बिंदेश्वरी पांडेय बने सदर कोतवाल

चंदौली जिले में राजनीति और पुलिसिंग में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली सदर कोतवाली को लेकर एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय से चली आ रही 'बिरादरी के बदले बिरादरी' वाली परंपरा को दरकिनार करते हुए, पुलिस कप्तान ने पारदर्शिता और निष्पक्षता की एक नई नजीर पेश की है। अब तक सदर कोतवाली को लेकर यह माना जाता था कि यहाँ तैनाती जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर की जाती है, लेकिन इस बार कार्यक्षमता और रिकॉर्ड को ही एकमात्र पैमाना बनाया गया।

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सात इंस्पेक्टरों का हुआ कड़ा साक्षात्कार
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सदर कोतवाली के प्रभारी पद के लिए सात योग्य इंस्पेक्टरों का चयन किया गया था। पुलिस विभाग के इतिहास में चंदौली में संभवतः पहली बार इतनी गहन समीक्षा प्रक्रिया अपनाई गई। सभी अभ्यर्थियों का एक तरह से साक्षात्कार (इंटरव्यू) लिया गया और उनके सेवा रिकॉर्ड, अनुशासन, पूर्व की कार्यशैली और शारीरिक फिटनेस का सूक्ष्म मूल्यांकन किया गया। पुलिस कप्तान की इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जिले की सबसे महत्वपूर्ण कोतवाली की कमान एक ऐसे व्यक्ति के हाथ में हो जिसका दामन पाक-साफ और कार्यशैली प्रभावी हो।

मेरिट में पिछड़े कई दावेदार: भ्रष्टाचार के दाग और अनफिट होना पड़ा भारी
इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान कई दावेदारों की खामियां भी उभरकर सामने आईं। सूत्रों की मानें तो एक इंस्पेक्टर की दावेदारी 'एंटी करप्शन' का मुकदमा दर्ज होने के कारण कमजोर पड़ गई। वहीं, एक अन्य अभ्यर्थी को शारीरिक रूप से अनफिट पाया गया। तीसरे दावेदार के अंकों और सेवा विवरण में विसंगतियां मिलने के कारण उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। यह पूरी प्रक्रिया यह दर्शाती है कि विभाग अब दागदार छवि या अक्षम अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने के मूड में नहीं है।

सैयदराजा के पूर्व प्रभारी को मिली जिम्मेदारी
चयन प्रक्रिया के अंत में, सैयदराजा में तैनात रह चुके और अपनी सख्त छवि के लिए मशहूर और एसपी के पीआरओ के पद पर तैनात इंस्पेक्टर बिंदेश्वरी पांडेय को सदर कोतवाली की कमान सौंपी गई है। बिंदेश्वरी पांडेय को उनकी त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और अपराध नियंत्रण में सक्रिय भूमिका के कारण क्षेत्र में "सिंघम" की उपाधि भी दी जाती रही है। उनकी नियुक्ति के साथ ही यह साफ हो गया है कि अब चंदौली में 'ठाकुर के बदले ठाकुर' या 'पंडित के बदले पंडित' वाली पुरानी पोस्टिंग स्टाइल इतिहास बन चुकी है।

एक नई कार्यसंस्कृति की शुरुआत
पुलिस कप्तान द्वारा अपनाए गए इस नए तरीके ने विभाग के भीतर और जनता के बीच सकारात्मक संदेश भेजा है। वर्षों बाद सदर कोतवाली किसी एक बिरादरी के वर्चस्व से मुक्त हुई है। स्थानीय लोगों और विभागीय कर्मचारियों का मानना है कि इस निष्पक्ष कदम से न केवल पुलिस का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि अपराध नियंत्रण में भी अधिक पारदर्शिता आएगी। यह बदलाव चंदौली पुलिस की कार्यसंस्कृति में सुधार की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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