चंदौली सदर तहसील में लेखपालों का धरना जारी, तहसील प्रशासन पर लगा रहे हैं उत्पीड़न का आरोप
लेखपालों का अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार जारी
लेखपालों ने प्रशासन पर लगाया उत्पीड़न का आरोप
वेतन बहाली और निष्पक्ष जांच की मांग
चंदौली सदर तहसील में लेखपालों का अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और धरना प्रदर्शन शुक्रवार को चौथे दिन भी जारी रहा। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के पदाधिकारियों ने प्रशासन पर उत्पीड़न और मनमाने निलंबन का गंभीर आरोप लगाया है। संघ का कहना है कि सदर तहसील के चार लेखपालों, जिनमें बृजेश पांडेय, बेचू यादव, नीलेश मिश्रा और शशिकला शामिल हैं, को पूर्व जांच अधिकारी ने आरोप मुक्त कर दिया था। हालांकि, उनकी रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए, कथित तौर पर उच्च पदस्थ अधिकारी से दोबारा जांच कराकर दबाव में पुनः आरोपित किया गया है।

वेतन बहाली और निष्पक्ष जांच की मांग
संघ ने इन सभी लेखपालों की तत्काल निष्पक्ष जांच कराने और वेतन बहाली की मांग की है। इसके अतिरिक्त, संघ ने कई अन्य मामले भी उठाए हैं। लेखपाल चंदन अग्रहरि को जिस काम के लिए पहले प्रशस्ति पत्र दिया गया था, उसी काम के संबंध में गलत आरोप लगाकर उन्हें निलंबित कर दिया गया है। एक महिला लेखपाल नूतन पर चरित्र पर टिप्पणी करते हुए मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और न्यायालय के प्रमाण के बावजूद निलंबित करने का आरोप भी लगाया गया है।
अन्य निलंबित लेखपालों का मुद्दा
धरने में अन्य निलंबित लेखपालों रामविलास यादव, संदीप मौर्य और संदीप सिंह के मामलों को भी उठाया गया। जिलाध्यक्ष विनय सिंह ने कहा कि इन सभी मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। इसके अलावा, दिवंगत लेखपाल दीपक कुमार की पत्नी को अभी तक मृतक आश्रित के रूप में सेवायोजित नहीं किया गया है। लेखपाल संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों का निष्पक्ष निराकरण नहीं किया जाता, तब तक उनका कार्य बहिष्कार जारी रहेगा, जिससे सरकारी कार्यों पर प्रभाव पड़ रहा है।
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