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बिछिया कला में मनाई गई सम्राट अशोक जयंती, लोगों ने लिया उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प

चंदौली के बिछिया कला में सम्राट अशोक महान की जयंती धूमधाम से मनाई गई। वक्ताओं ने उनके शांति, अहिंसा और जनसेवा के संदेश को याद करते हुए नई पीढ़ी को उनके मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।

 
 

बिछिया कला बुद्ध मंदिर में जयंती

सम्राट अशोक महान का ऐतिहासिक योगदान

हिंसा छोड़ शांति का मार्ग अपनाया

समाज में भाईचारे का दिया संदेश

नई पीढ़ी तक विचार पहुंचाने का संकल्प

चंदौली के सदर तहसील क्षेत्र स्थित बिछिया कला में जिला बुद्ध मंदिर बौद्ध विहार में चक्रवर्ती सम्राट प्रियदर्शी अशोक महान की जयंती बड़े ही श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाई गई। इस विशेष कार्यक्रम में बौद्धाचार्य की गरिमामयी मौजूदगी रही। कार्यक्रम में एकत्र हुए सभी लोगों ने सम्राट अशोक के व्यक्तित्व, कृतित्व और उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया। सबने एक स्वर में उनके बताए मानवतावादी रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।

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हिंसा का त्याग और शांति के रास्ते की शुरुआत
कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने सम्राट अशोक के जीवन पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक भारतीय इतिहास के एक ऐसे महान राजा थे, जिन्होंने अपने राज-काज में शांति, दया, करुणा, अहिंसा और जनता की भलाई को सबसे ऊपर रखा। कलिंग युद्ध के भारी विनाश के बाद उनके जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आया था। युद्ध की पीड़ा को महसूस करने के बाद उन्होंने हिंसा का रास्ता हमेशा के लिए छोड़ दिया।

बौद्ध धर्म के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाया
युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने शांति और मानवता का मार्ग चुना और बौद्ध धर्म के सिद्धांतों को घर-घर पहुँचाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। वक्ताओं ने कहा कि सम्राट अशोक ने अपने विचारों और कामों से समाज को हमेशा प्रेम, आपसी तालमेल, सहनशीलता और भाईचारे का पाठ पढ़ाया। उनके समय में बने शिलालेख और अशोक स्तंभ आज भी उनके ऊंचे आदर्शों, नैतिक मूल्यों और जन-कल्याण वाली सोच की याद दिलाते हैं।

वर्तमान समय में अशोक के विचारों की जरूरत
समारोह में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि असली महानता सिर्फ ताकत हासिल करने या जंग जीतने में नहीं है, बल्कि लोगों की सेवा करने और सबको एक बराबर समझने में है। आज के दौर में भी सम्राट अशोक के विचार उतने ही जरूरी हैं जितने पहले थे। आज के समाज में फैले भेदभाव को खत्म करने के लिए उनके शांति और अहिंसा के संदेश को हर व्यक्ति तक पहुँचाना बहुत जरूरी है।

नई पीढ़ी को प्रेरित करने का लिया गया संकल्प
इस खास मौके पर अरुण कुमार मौर्य, संजय मौर्य, अवधेश नारायण, शिवपूजन मौर्य, शिवनारायण मौर्य और विजय कुमार मौर्य समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे। सभी ने सम्राट अशोक महान के इतिहास को याद किया और उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की बात कही। बिछिया कला के बुद्ध मंदिर में हुए इस कार्यक्रम ने लोगों को अशोक महान के गौरवशाली इतिहास और बुद्ध की सोच को फिर से जीने का मौका दिया।

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