चंदौली में टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक संगठनों का प्रदर्शन, पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन
चंदौली में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने आदेश वापस न होने पर व्यापक आंदोलन और दिल्ली कूच की चेतावनी दी।
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ प्रदर्शन
पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन
शिक्षक संगठनों की अभूतपूर्व एकजुटता
दोहरे मापदंड का लगाया आरोप
दिल्ली कूच की घोषणा
चंदौली जनपद में शिक्षक संघों की अभूतपूर्व एकजुटता ने शिक्षा महकमे और प्रशासनिक हलकों में खासा कौतूहल पैदा कर दिया। विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी और सैकड़ों शिक्षक गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को सौंपा। इस दौरान शिक्षकों ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को लेकर गहरा विरोध दर्ज कराया।
शिक्षक संघ के उत्तर प्रदेश अनुकंपा अध्यक्ष आनंद नारायण मिश्रा ने कहा कि टीईटी को अनिवार्य बनाए जाने के आदेश से पहले से कार्यरत शिक्षकों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है। उनका आरोप है कि सरकार द्वारा दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। अन्य विभागों में एक बार नियुक्ति के बाद दोबारा किसी प्रकार की परीक्षा अनिवार्य नहीं की जाती, जबकि शिक्षकों पर बार-बार परीक्षा का दबाव बनाया जा रहा है। इसे उन्होंने शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार बताया।
कलेक्ट्रेट परिसर में शिक्षक संघ के नेताओं ने कहा कि वे शिक्षा की गुणवत्ता के पक्षधर हैं, लेकिन पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्तें थोपना न्यायसंगत नहीं है। उनका कहना है कि न्यायालय के आदेश का असर केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवारों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। मानसिक तनाव, सेवा अस्थिरता और भविष्य की अनिश्चितता ने शिक्षकों को चिंतित कर दिया है।
शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस आदेश पर पुनर्विचार नहीं किया तो सड़क से लेकर सदन तक व्यापक आंदोलन किया जाएगा। मार्च के तीसरे सप्ताह में शिक्षक संघ द्वारा दिल्ली कूच करने की भी घोषणा की गई है। इसके लिए प्रदेश भर में जनसमर्थन जुटाने की रणनीति बनाई जा रही है।
अंत में शिक्षकों ने प्रशासन से मांग की कि उनकी भावनाओं और वर्षों की सेवा को ध्यान में रखते हुए टीईटी अनिवार्यता के आदेश में संशोधन किया जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके और शिक्षकों का सम्मान भी बना रहे।
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